शपथ ग्रहण समारोह में परिजनों और मीडिया की रोक पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाये सवाल

Created on Wednesday, 10 June 2026 12:39
Written by Shail Samachar

शिमला/शैल। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर स्थानीय निकाय चुनावों के बाद जनादेश और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अपमान का आरोप लगाया है। शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है और भाजपा को समर्थन मिला है, लेकिन मुख्यमंत्री इस जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हार की बौखलाहट में सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जो लोकतांत्रिक परंपराओं और जनमत के सम्मान के खिलाफ हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा जिला परिषद और ब्लॉक समिति सदस्यों को लेकर दिया गया बयान जनादेश का अपमान था। इसके बाद जिला परिषद सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में परिजनों और मीडिया को प्रवेश नहीं देने का निर्णय भी इसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है और परंपरागत रूप से उनके परिवार के सदस्य भी इस समारोह का हिस्सा बनते रहे हैं। यह जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों के लिए सम्मान और गौरव का क्षण होता है, लेकिन सरकार ने इस परंपरा को तोड़कर निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपमान किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार स्थानीय निकायों और पंचायत संस्थाओं में भाजपा समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार का उद्देश्य जिला परिषद, ब्लॉक समिति तथा स्थानीय निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनावों में राजनीतिक लाभ हासिल करना है। इसके लिए भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के मुखिया के रूप में जनमत का सम्मान करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय सरकार जनादेश को अपने पक्ष में मोड़ने के प्रयासों में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने के लिए अधिकारियों को लगाया गया है और विभिन्न माध्यमों से उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस उद्देश्य से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है, सरकार उसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव की समयावधि बढ़ाने के निर्णय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले नगर पंचायत और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सभासदों के निर्वाचन के सात दिनों के भीतर कराने का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए इस अवधि को बढ़ा दिया है। उनके अनुसार यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी हार को छिपाने और सत्ता का प्रभाव बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि स्थानीय निकायों में जनता ने जिस प्रकार भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, उससे कांग्रेस सरकार असहज है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जनादेश को स्वीकार करने के बजाये निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर सत्ता समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्रा और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा जनादेश की ‘चोरी’ नहीं होने देगी और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक दुरुपयोग का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वाेपरि होता है और सरकार को उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर जनादेश का सम्मान करें और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करें।
उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों और पंचायत संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।