कांग्रेस का नेता प्रतिपक्ष पर पलटवार मुकद्दमों का फैसला अदालत करेगी, भाजपा नहीं
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Created on Thursday, 02 July 2026 08:29
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर और भाजपा नेताओं के बयानों के बाद अब कांग्रेस सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। दोनों मंत्रियों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर राजनीतिक दबाव बनाने तथा उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है, जिससे उसका कर्मचारी विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है।
मंत्रियों ने कहा कि किसी भी मामले में दर्ज मुकद्दमे सही हैं या गलत, इसका फैसला अदालतों को करना है, न कि राजनीतिक नेताओं को। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में जांच चल रही है तो उसे कानून के अनुसार पूरा होने देना चाहिए। सार्वजनिक मंचों से यह कहना कि मुकद्दमे गलत हैं या अधिकारियों को भविष्य में परिणाम भुगतने होंगे, न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर दबाव बनाने जैसा है।
कांग्रेस के दोनों मंत्रियों ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर से सवाल किया कि क्या उनके मुख्यमंत्री रहते हुए मुकद्दमे दर्ज नहीं होते थे। यदि उस समय कानून के तहत दर्ज मामलों को सही माना जाता था तो अब वही प्रक्रिया गलत कैसे हो गई। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह रुख उसकी दोहरी राजनीति और अवसरवादी सोच को दर्शाता है।
अनिरुद्ध सिंह और राजेश धर्माणी ने आरोप लगाया कि भाजपा का रिकॉर्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों के प्रति कभी सकारात्मक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना का विरोध हो या कर्मचारियों के अन्य अधिकारों का मामला, भाजपा ने हमेशा कर्मचारी हितों की अनदेखी की। इसके विपरीत वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पुरानी पेंशन योजना लागू कर कर्मचारियों से किया गया बड़ा वादा पूरा किया।
मंत्रियों ने भाजपा पर आंतरिक संकट का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि पार्टी इस समय गुटबाजी और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। ऐसे में जनता का ध्यान इन समस्याओं से हटाने के लिए भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ विवाद खड़े कर रही है तथा अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
दोनों मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को राजनीतिक दबाव में काम करने की जरूरत नहीं है। सरकार ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ खड़ी है जो कानून के दायरे में रहकर अपने दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निष्पक्ष तरीके से काम करने वाले अधिकारियों को सरकार पूरा संरक्षण देगी।
वित्तीय मामलों को लेकर भी कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा। मंत्रियों का दावा है कि पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी और जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में केंद्र से लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली थी, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को वेतन आयोग के एरियर और अन्य वित्तीय लाभ नहीं दिए गए। उनका कहना है कि मौजूदा कांग्रेस सरकार कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है।
कांग्रेस ने भाजपा पर धमकी और दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में प्रशासनिक फैसलों, दर्ज मुकद्दमों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। भाजपा जहां सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस इसे कानून के अनुसार चल रही प्रक्रिया बताते हुए भाजपा पर न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगा रही है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में अधिकारियों, कर्मचारियों और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे हिमाचल की राजनीति के प्रमुख चुनावी और राजनीतिक विषय बने रह सकते हैं।