शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति अब नए दौर में पहुंच चुकी है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को एक साथ जोड़कर बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। चुनावी गारंटियां, घटता बजट, बढ़ता कर्ज, सरकारी योजनाओं की रफ्रतार, एचआरटीसी की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक फैसले अब भाजपा के प्रमुख हमले का आधार बन गए हैं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर लगातार इन मुद्दों को उठाकर सरकार को घेर रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव को ‘गारंटी बनाम हकीकत’ के मुद्दे पर लड़ने की तैयारी कर रही है।
सबसे ज्यादा विवाद मुख्यमंत्री की प्रस्तावित ‘सुखी परिवार योजना’ को लेकर है। भाजपा का आरोप है कि सरकार नई योजनाओं की घोषणा तो कर रही है, लेकिन उनके लिए बजट की व्यवस्था नहीं है। विपक्ष का कहना है कि समाज कल्याण विभाग का बजट पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 63 प्रतिशत घटकर 1618 करोड़ रुपये से 604 करोड़ रुपये रह गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नई योजना का खर्च सरकार कैसे उठाएगी। भाजपा का दावा है कि जब पुरानी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा, तब नई योजनाएं केवल घोषणा बनकर रह सकती हैं।
विपक्ष का हमला केवल बजट तक सीमित नहीं है। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री की कई योजनाओं को ‘चाइनीज खिलौना’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पहले बड़ी घोषणा करती है, लेकिन बाद में योजनाएं ठंडी पड़ जाती हैं। भाजपा का कहना है कि सरकार जमीन पर काम करने की बजाय प्रचार पर ज्यादा ध्यान दे रही है। विपक्ष दावा कर रहा है कि विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार फ्रलैगशिप योजनाओं पर खर्च कम हुआ, जबकि प्रचार-प्रसार पर ज्यादा पैसा खर्च किया गया।
भाजपा अब कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है। विपक्ष लगातार पूछ रहा है कि पांच लाख रोजगार, महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये, 300 यूनिट मुफ्त बिजली, दूध के बढ़े हुए समर्थन मूल्य और अन्य चुनावी वादों की स्थिति क्या है। भाजपा का कहना है कि जनता अब घोषणाएं नहीं, बल्कि उनका परिणाम देखना चाहती है।
सरकार की कार्यशैली भी विपक्ष के निशाने पर है। जयराम ठाकुर का आरोप है कि फैसले संस्थागत व्यवस्था के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। भाजपा का दावा है कि सरकार के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है और कई मंत्री अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। हालांकि सरकार इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताती रही है।
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी भाजपा लगातार सवाल उठा रही है। जयराम ठाकुर का कहना है कि मौजूदा सरकार ने साढ़े तीन साल में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है और राज्य की कुल देनदारी 1.15 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है। भाजपा पूछ रही है कि यदि इतना बड़ा कर्ज लिया गया है तो उसका असर विकास कार्यों और जनता को मिलने वाली सुविधाओं में क्यों दिखाई नहीं दे रहा।
एचआरटीसी की हालत भी अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। बसों में टायर और स्पेयर पार्ट्स की कमी, कई रूटों पर सेवाओं का प्रभावित होना, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से जुड़े मुद्दों को विपक्ष सरकार की आर्थिक स्थिति से जोड़ रहा है। भाजपा का आरोप है कि परिवहन निगम की बिगड़ती व्यवस्था का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है।
इसके अलावा भाजपा सरकार पर आपदा राहत, संस्थानों को बंद करने, कॉलेजों के फैसलों और विभिन्न परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठा रही है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को जोड़कर यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार प्रशासनिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर दबाव में है।
यदि सरकार की चुनावी गारंटियां और घोषणाएं कागजों तक सीमित रहीं, तो भाजपा का ‘वादे बनाम हकीकत’ अभियान 2027 के विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। ऐसे में हिमाचल की राजनीति का अगला अध्याय अब सरकार के दावों से ज्यादा उसके प्रदर्शन पर तय होगा।