2047 तक विकसित भारत, क्या आसान होगी राह?

Created on Monday, 17 August 2026 06:37
Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का बड़ा लक्ष्य सामने रखा, लेकिन इस लक्ष्य के साथ सरकार ने देश के सामने आत्मनिर्भरता, रोजगार, तकनीक, रक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कठिन चुनौतियां भी रख दी हैं। करीब डेढ़ घंटे से अधिक लंबे संबोधन में प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं और आने वाले 5 से 7 वर्षों के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’ के जरिए भारत की आर्थिक और रणनीतिक दिशा तय करने का संकेत दिया।
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि आने वाले दौर में भारत केवल विदेशी कंपनियों के लिए बड़ा बाजार नहीं रह सकता। देश को डिजाइन से लेकर उत्पादन और छोटे पुर्जों से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन अपने यहां विकसित करनी होगी। मैन्युफैक्चरिंग को पहली प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने ‘जीरो डिफेक्ट’ और गुणवत्ता को वैश्विक पहचान बनाने की जरूरत बताई। इसका सीधा संदेश घरेलू उद्योग और एमएसएमई के लिए है कि अब संरक्षण से ज्यादा प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता पर टिकना होगा।
सेमीकंडक्टर को लेकर प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तीन प्लांट शुरू हो चुके हैं और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट शुरू किए जाएंगे। क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा सुरक्षा को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया गया। 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य सामने रखकर सरकार ने संकेत दिया कि एआई, डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और आधुनिक उद्योगों की बढ़ती बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए पारंपरिक ऊर्जा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी।
प्रधानमंत्री के भाषण में वैश्विक व्यापार को लेकर भी आक्रामक रणनीति दिखाई दी। करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एमएसएमई, किसानों और उद्योगों से वैश्विक बाजार में उतरने का आहवान किया। लेकिन इसके साथ गुणवत्ता और वैश्विक मानकों को पूरा करने की चुनौती भी सामने रखी। यानी भारतीय उत्पादों के लिए बाजार खुलने के साथ विदेशी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार भी खुलेंगे। ऐसे में घरेलू उद्योगों की वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
कृषि को दूसरी ‘शक्ति धारा’ बताते हुए प्रधानमंत्री ने खेत से सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने की बात कही। रसायन मुक्त खेती और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया। इससे किसानों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है, लेकिन इसके लिए भंडारण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता प्रमाणन, परिवहन और निर्यात ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी होगा।
युवाओं के लिए प्रधानमंत्री ने अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल देने की घोषणा की। देश में ढाई लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और एक लाख करोड़ रुपये के इनोवेशन फंड का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं को नई अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने का आहवान किया। शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के बीच मौजूद दूरी को पाटना अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी।
महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने तीन करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य पूरा होने और छह करोड़ लखपति दीदियां बनाने का नया लक्ष्य रखा। साथ ही सभी राजनीतिक दलों से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के लिए महिला आरक्षण लागू करने की अपील की। यह घोषणा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रधानमंत्री का रुख और ज्यादा सख्त रहा। ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, हाइपरसोनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा में भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में ले जाने की बात कही गई। उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और खतरे केवल सीमा तक सीमित नहीं हैं। रक्षा निर्यात बढ़ने और करीब 100 देशों तक भारतीय हथियार पहुंचने का दावा भी किया गया।
भाषण का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को लेकर रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र के साथ राज्यों और स्थानीय निकायों को भी पुराने नियम-कायदों से बाहर निकलना होगा। 2047 के लक्ष्य के अनुरूप नीतियां बनाने की जरूरत बताकर उन्होंने प्रशासनिक सुधारों को विकास की अगली बड़ी शर्त के रूप में पेश किया।
प्रधानमंत्री ने नशे के खिलाफ लड़ाई और नक्सलवाद पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नक्सली हिंसा में सुरक्षाबलों की बड़ी संख्या में हुई मौतों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि नक्सली हिंसा अब अंतिम चरण में है। हालांकि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल कर वैचारिक स्तर पर भी एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
कुल मिलाकर, लाल किले का भाषण उपलब्धियों के दावों से ज्यादा भविष्य के बड़े लक्ष्यों की घोषणा का भाषण रहा। 2047 का विकसित भारत अब केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक दिशा के रूप में पेश किया गया है। मगर इस लक्ष्य की असली परीक्षा घोषणाओं में नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने, किसानों की आय बढ़ाने, उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने, युवाओं को कौशल देने, ऊर्जा सुरक्षित करने और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की वास्तविक हिस्सेदारी बढ़ाने में होगी। अगले पांच से सात वर्ष यह तय करेंगे कि ‘सप्त धारा’ वास्तव में भारत की विकासधारा बनती है या फिर बड़े लक्ष्यों और जमीनी परिणामों के बीच की दूरी बनी रहती है।