राजभवन पहुंचा विमल नेगी प्रकरण दोषियों के खिलाफ कारवाई की मांग
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Created on Thursday, 02 July 2026 03:57
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत का मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन के केंद्र में आ गया है। इस बार विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने प्रेस वार्ता में बताया कि जांच एजेंसी ने पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना में कथित अनियमितताओं, वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव और विमल नेगी के मानसिक उत्पीड़न के बीच संबंधों की पुष्टि की है। उन्होंने हिमाचल जनजातीय लोक अधिकार महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कारवाई करने और विमल नेगी प्रकरण मे न्याय दिलवाने के लिये आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान किरण नेगी ने कहा कि उनके पति पर सरकारी परियोजना में भ्रष्टाचार से जुड़े निर्णयों को मंजूरी देने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विमल नेगी ने नियमों के विपरीत प्रस्तावों का समर्थन करने से इन्कार किया तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनके अनुसार, घंटों कार्यालय में खड़ा रखा जाता था, लगातार दबाव में रखा जाता था और कार्यस्थल का माहौल इतना तनावपूर्ण बना दिया गया था कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। उन्होंने दावा किया कि कॉर्पाेरेट कार्यालय में स्थानांतरण के बाद ही उनके पति को उच्च रक्तचाप सहित कई स्वास्थ्य समस्याएं होने लगी थीं।
जांच दस्तावेज़ में जांच के दौरान विमल नेगी के मामले में "systematic pattern of mental torture, professional harassment and criminal conspiracy" पैटर्न सामने आया। जांच में यह पाया गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से परियोजना संबंधी मंजूरियों और भुगतानों को सुविधाजनक बनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि यह उल्लेखनीय है कि इन दस्तावेज़ों में दर्ज निष्कर्षों की अंतिम कानूनी पुष्टि न्यायालय में होना अभी बाकी है।
जांच के अनुसार विमल नेगी ने 15 जून 2024 को शोंगटोंग परियोजना से स्थानांतरित होकर एचपीपीसीएल के कॉर्पाेरेट कार्यालय में कार्यभार संभाला था। इसके बाद 10 मार्च 2025 को उनके लापता होने और 18 मार्च 2025 को सतलुज नदी से उनका शव बरामद होने का उल्लेख है। मल्टी इंस्टीटयूशनल मेडिकल बोर्ड ने मौत का कारण "Ante Mortem Drowning" अर्थात जीवित अवस्था में डूबने से मृत्यु बताया। लेकिन परिवार का कहना है कि यह रिपोर्ट केवल मृत्यु का चिकित्सकीय कारण बताती है, यह नहीं बताती कि वह किन परिस्थितियों में नदी तक पहुंचे और मौत से पहले उनके साथ क्या हुआ।
सीबीआई जांच में पेखुबेला सौर ऊर्जा परियोजना को प्रमुख आधार बताया गया है। दस्तावेज़ के अनुसार मई 2023 में इस परियोजना का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था और इसे 180 दिनों के भीतर पूरा किया जाना था। लेकिन तय समय में परियोजना पूरी नहीं हो सकी और ठेकेदार को पांच बार अस्थायी समय-विस्तार दिया गया। जांच में इसी प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
जांच रिपोर्ट में आरोप है कि तत्कालीन प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और निदेशक ;(इलेक्ट्रिकल) देशराज ने कथित रूप से ठेकेदार के पक्ष में प्रस्ताव तैयार करवाने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव बनाया। जांच में यह भी दर्ज है कि अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा ई-ऑफिस फाइलों में दर्ज टिप्पणियों और आपत्तियों को दबा दिया गया तथा उनके स्थान पर ठेकेदार के पक्ष में प्रस्ताव आगे बढ़ाए गए। दस्तावेज़ में इन अधिकारियों पर सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करते हुए कथित आपराधिक साजिश के तहत ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप भी दर्ज किया गया है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।
किरण नेगी का कहना है कि उनके पति इसी कथित दबाव का विरोध कर रहे थे। उनका दावा है कि विमल नेगी ने नियमों के विपरीत किसी भी फाइल को मंजूरी देने से इन्कार किया, जिसके बाद उन्हें लगातार मानसिक तनाव में रखा गया। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी ने भी मानसिक प्रताड़ना और पेशेवर उत्पीड़न का उल्लेख किया है तो सरकार अब यह नहीं कह सकती कि मामला केवल व्यक्तिगत तनाव का था। उन्होंने मांग की कि जांच में जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ तत्काल कारवाई की जाए।
प्रेस वार्ता में किरण नेगी ने सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इस पुरे प्रकरण के पीछे किसी नेता के होने की बात भी प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सच्चाई सामने लाने के बजाये उन्हीं लोगों से रिपोर्ट तैयार करवाई जिन पर सवाल उठ रहे थे। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता का दावा करने वाली सरकार को इस मामले में पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि लोगों के सामने वास्तविक तथ्य आ सकें।
उन्होंने कहा कि घटना को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है लेकिन आज भी सबसे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब नहीं मिला है। आखिर 10 मार्च से 18 मार्च के बीच विमल नेगी कहां थे? क्या उनका अपहरण किया गया था? उनके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच में क्या सामने आया? यदि मौत आत्महत्या थी तो उसके पीछे परिस्थितियां क्या थीं और यदि कोई अन्य कारण था तो उसका खुलासा क्यों नहीं किया गया? उनका कहना है कि परिवार आज भी इन सवालों के जवाब का इंतजार कर रहा है।
किरण नेगी का कहना है कि उन्हें किसी राजनीतिक लाभ की नहीं बल्कि निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा है। उनका कहना है कि यदि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी कथित दबाव और प्रताड़ना से सुरक्षित नहीं है तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्रा के लिए चिंता का विषय है।
विमल नेगी का मामला अब केवल एक अधिकारी की मौत का मामला नहीं रह गया है। कथित सीबीआई दस्तावेज़ों में परियोजना आवंटन, समय-विस्तार, फाइल प्रक्रिया, वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और मानसिक प्रताड़ना जैसे कई गंभीर मुद्दों का उल्लेख होने के कारण यह मामला सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। यदि जांच एजेंसी के निष्कर्ष आगे न्यायिक परीक्षण में भी कायम रहते हैं तो इसके दूरगामी प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।
फिलहाल सरकार या दस्तावेज़ों में जिन अधिकारियों का उल्लेख किया गया है, उनकी ओर से इन आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले का दूसरा पक्ष आना अभी बाकी है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि परिवार द्वारा सार्वजनिक किए गए कथित सीबीआई दस्तावेज़ों ने इस पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें सरकार की अगली कारवाई, संबंधित अधिकारियों के जवाब और सबसे महत्वपूर्ण, न्यायालय में होने वाली आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि आरोप चाहे जितने गंभीर हों, उनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।