क्या बैंस के माध्यम से ई.डी. हिमाचल में कुछ बड़ा करने जा रही है?

Created on Sunday, 05 October 2025 15:38
Written by Shail Samachar

शिमला/शैल। कांगड़ा केन्द्रीय सहकारी बैंक धर्मशाला का निदेशक मण्डल नाबार्ड और आर.बी.आई. की रिपोर्ट के बाद भंग कर दिया गया है। नाबार्ड ने पूरे निदेशक मण्डल के सदस्यों से जवाब तलबी की है। इसी बीच इस प्रकरण में ई.डी का दखल हो गया है। ई.डी. ने बैंक प्रबंधन से शिमला में पूछताछ की है। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में सी.बी.आई. का भी दखल होने वाला है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि बैंक के घोटाले में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। बैंक में जिस तरह का कामकाज पिछले आठ वर्षों से चल रहा था उसको देखते हुये सरकार ने निदेशक मण्डल को निलंबित कर दिया है। बैंक के निदेशक मण्डल के निलंबन का आधार नाबार्ड और आर.बी.आई. की विस्तृत रिपोर्ट बनी है। लेकिन मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से यह संदेश गया है कि इस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त निदेशक मण्डल भी बैंक की कार्य प्रणाली में सुधार नहीं ला पाया बल्कि उसी कार्य संस्कृति को आगे बढ़ाता रहा। प्रदेश के सरकारी बैंकों पर पंजीयक सहकारी सभाओं के माध्यम से सरकार का पूरा नियंत्रण है और इसी नियंत्रण के माध्यम से सहकारी बैंकों को सहकारिता विभाग से निकाल कर वित्त विभाग के अधीन ला दिया गया और वित्त विभाग का प्रभार मुख्यमंत्री के अपने पास हैं। बैंक किसी को भी कोई भी राहत ऋण के मामले में ओ.टी.एस. योजना के तहत ही दे सकता है। इस परिदृश्य में इन दिनों जिस तरह से 45 करोड़ के ऋण को 21 करोड़ में सेटल करने का प्रकरण चर्चा में आया है और बैंक में ई.डी. का दखल हो गया है उससे इस मामले ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।
स्मरणीय है कि कांगड़ा केन्द्रीय सहकारी बैंक धर्मशाला बैंस प्रकरण के कारण चर्चा में आया और इस समय प्रदेश का सबसे गंभीर मुद्दा बन चुका है। जिसका राजनीतिक प्रतिफल बहुत गंभीर होने के संकेत बाहर आते जा रहे हैं। क्योंकि यह चर्चा तब उठी जब बैंस ने एक पत्रकार वार्ता में यह आरोप लगाया कि उसने ई.डी. में शिकायत दर्ज करवाई है और इस शिकायत के आधार पर ई.डी. ने नादौन और हमीरपुर में छापेमारी की तथा दो लोगों को हिरासत में ले लिया। इसी छापेमारी के दौरान बैंस के खिलाफ उसके ऋण मामले को लेकर विजिलेंस में केस दर्ज हो गया। केस दर्ज होने पर बैंस उच्च न्यायालय पहुंच गये और उच्च न्यायालय ने जिस तर्ज में इस मामले में टिप्पणियां की है उनसे स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला बहुत कमजोर है। बैंस को जो ऋण बैंक ने स्वीकृत किया उसमें बैंक ने स्वतः ही कटौती कर दी जबकि बैंस ने इस ऋण के लिए जो संपत्ति बैंक के पास गिरवी रखी थी उसकी कीमत 2018 में 75 करोड़ आंकी गई थी। परन्तु बाद में बैंक प्रबंधन ने बैंस को संद्धर्भ में लिये बिना ही उसकी कीमत 20 करोड़ कर दी। यहां यह स्वभाविक प्रश्न उठता है कि मनाली में जिस जमीन की कीमत 2018 में 75 करोड़ थी उसकी कीमत 2023 में 20 करोड़ कैसे रह गयी। अब जब बैंक में ई.डी. ने दखल दिया है और बैंस का रिकॉर्ड तलब किया तब उसकी फाइल ही बैंक ने गायब कर दी। यह फाइल गायब होने पर बैंक ने अपने अधिकारियों के खिलाफ जांच आदेशित कर दी है। बैंस के केस की फाइल ही बैंक द्वारा गायब कर दिये जाने से बैंस द्वारा बैंक प्रबंधन पर लगे जा रहे आरोप स्वतः ही गंभीर हो जाते हैं। फिर ओ.टी.एस. को लेकर भी यह सामने आ चुका है कि बैंक द्वारा लायी गयी यह योजना स्वतः ही लैप्स हो गयी है क्योंकि इसमें छः माह तक कोई कारवाई ही नहीं हुई है और नियमों के मुताबिक योजना में गैप आने पर इसको पुनः लागू करने के लिये आर.बी.आई. और नाबार्ड से नये सिरे से अनुमति लेनी पड़ती है। पंजीयक सहकारी सभाएं ने यह स्पष्ट उल्लेख किया है कि यह अनुमति लेना अनिवार्य है। परन्तु बैंक प्रबंधन ने अपने ही स्तर पर ओ.टी.एस. को पुनः चालू कर दिया और 45 करोड़ का ऋण 21 करोड़ में सेटल कर दिया। बैंक में घटे इस सबके परिदृश्य में बैंस द्वारा लगाये जा रहे सारे आरोप स्वतः ही प्रमाणित हो जाते हैं। क्योंकि बैंस ने यह दावा किया है कि उसने इस संद्धर्भ में उससे मिले हर व्यक्ति की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर रखी है। यह रिकॉर्डिंग ई.डी. और सी.बी.आई. को भी उपलब्ध करवा दिये जाने का दावा बैंस ने किया है। बैंस ने यह आरोप लगाया है कि उसकी अपने ऋण मामले में मनाली में बैंक के पास गिरवी रखी गयी जमीन को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को देने की योजना बनायी गयी थी। प्रियंका गांधी को यह जमीन देने की बात बैंस को ज्ञानचन्द के माध्यम से सूचित की गयी थी। बैंस के मुताबिक इस सबकी उसने रिकॉर्डिंग कर रखी है। स्वभाविक है कि जब ई.डी. को कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध करवाया गया होगा तभी ई.डी. ने इस मामले में कदम उठाया होगा। वैसे ही ई.डी. पर यह आरोप है कि वह राजनीतिक आकांओं के इशारे पर काम करती है। इस समय राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति जिस मोड पर आ पहुंची है उसके परिदृश्य में भी यह माना जा रहा है कि हिमाचल में अगले दो-तीन माह में कुछ बड़ा घटेगा। क्योंकि यदि बैंस की जमीन प्रियंका गांधी को दिये जाने का संदेश किसी भी नेता ने दिया है और उसकी ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग ई.डी., सी.बी.आई. तक पहुंच चुकी है तो उसके राजनीतिक अर्थ बहुत दूरगामी हो जाते हैं यह तय है।