ए.एस.आई. पंकज को जमानत मिलने के बाद विमल नेगी मौत प्रकरण की जांच पर उठने लगे सवाल

Created on Sunday, 02 November 2025 14:40
Written by Shail Samachar

शिमला/शैल। स्वर्गीय विमल नेगी मौत प्रकरण में गिरफ्तार हुये ए.एस.आई. पंकज शर्मा को प्रदेश उच्च न्यायालय से जमानत मिल गयी है। पंकज शर्मा को सीबीआई ने 14 सितम्बर को गिरफ्तार किया था और यह जांच उच्च न्यायालय ने 23 मई को सीबीआई को सौंपी थी। पंकज शर्मा की हिरासत बढ़ाये जाने के सीबीआई के आग्रह को अदालत ने अस्वीकार कर दिया था और सीबीआई ने अदालत के इस आदेश को कोई चुनौती नहीं दी थी। यह चुनौती न दिया जाना ही उच्च न्यायालय में पंकज को जमानत मिलने का एक बड़ा आधार बना है। वैसे सीबीआई ने अदालत के संज्ञान में यह अवश्य लाया है की पंकज शर्मा ने जांच के दौरान उसका नार्काे और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाये जाने को सहमति व्यक्त की थी परन्तु जब उसे इसके लिये अदालत में पेश किया गया तो उसने इससे इन्कार कर दिया। यह टेस्ट अभियुक्त की सहमति के बिना नहीं करवाये जा सकते हैं यह नियमों में प्रावधान है। पंकज शर्मा को जमानत मिलने से यह मामला फिर उसी स्टेज पर आ पहुंचा है जहां से यह शुरू हुआ था। स्मरणीय है कि पंकज शर्मा इस मामले का एक केन्द्रीय पात्र बन चुका है क्योंकि जब विमल नेगी का शव बरामद हुआ था तब घटनास्थल पर पहुंचने वालों में पंकज ही पहला पुलिस अधिकारी था। पंकज ने ही विमल नेगी की तलाशी में मिले सामान को लिया था और उसमें से पैन ड्राइव को उसने अपने ही पास रख लिया और बाद में उसे सदर थाना शिमला में फारमैट कर दिया। यह सब थाने के सीसीटीवी कैमरा में दर्ज है। यह सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में उच्च न्यायालय में कहा है।
विमल नेगी प्रकरण में पुलिस ने दो एसआईटी गठित की थी और पंकज शर्मा किसी भी एसआईटी का सदस्य नहीं था ऐसे में वह घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने और शव की तलाशी लेने वाला कैसे तथा किसके निर्देश पर बना? पैन ड्राइव को किसके निर्देश पर फारमैट किया? यह प्रश्न अभी तक अनुतरित हैं। सीबीआई इन सवालों का जवाब नहीं खोज पायी है। नेगी के परिजनों का आरोप है कि नेगी को पावर कारपोरेशन में प्रबन्ध निदेशक मीणा और निर्देशक देशराज प्रताड़ित करते थे और इसी प्रताड़ना का परिणाम है विमल नेगी की मौत। देशराज सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत पर हैं और हरिकेश मीणा उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत पर हैं। ऐसे में पंकज की जमानत के बाद यह संभावना भी व्यक्त की जाने लगी है कि इन लोगों को भी नियमित जमानत मिल जाएगी। प्रदेश सरकार भी इस मामले में एक पक्ष बनने का प्रयास कर रही है। एसपी शिमला सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके है। पावर कारपोरेशन द्वारा निष्पादित की जा रही परियोजनाओं में भ्रष्टाचार होने के आरोप लगे हैं। यह भी आरोप है कि स्व. नेगी पर भी इस भ्रष्टाचार में सहभागी बनने के लिये दबाव डाला जा रहा था। सीबीआई इस मामले की जांच पिछले पांच माह से कर रही है। पंकज शर्मा की गिरफ्तारी इस प्रकरण में अब तक पहली गिरफ्तारी रही है और उसमें भी अब जमानत मिल जाने के बाद सीबीआई का अगला सफर इस मामले में स्वतः ही प्रश्नित होता जा रहा है। क्योंकि सीबीआई अभी तक कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर प्रकाश नहीं डाल पायी है। इस वस्तुस्थिति में स्व. नेगी के परिजनों को कब न्याय मिलेगा यह सवाल एक बार फिर अनिश्चितता के साये में आ खड़ा हुआ है।