चुनाव आयोग शीर्ष न्यायपालिका और सरकार सबका एक साथ प्रश्नित होना घातक होगा

Created on Tuesday, 13 January 2026 18:39
Written by Shail Samachar
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली अर्थव्यवस्था करार दिया है। आईएमएफ ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार आर्थिक आंकड़ों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रही है। भारत सरकार ने आईएमएफ के इस आकलन का कोई जवाब नहीं दिया है। लेकिन इस आकलन के आईने में कुछ आंकड़े अवश्य ही सोचने पर विवश करते हैं कि यह सरकार देश के अस्सी करोड़ लोगों को पांच किलो मुफ्त राशन हर माह दे रही है। यदि 144 करोड़ के देश में 80 करोड़ लोगों को सरकार के 5 किलो मुफ्त राशन पर आश्रित रहना पड़ रहा है तो इसी से विकास के सारे दावों पर स्वतः ही प्रश्न चिन्ह लग जाता है। इस समय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर पर चल रहा है और यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि रुपया जो आज 90 के पार है जल्द ही 100 का आंकड़ा छू सकता है। आज कर्जदारों में देश शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है और रसोई गैस का जो सिलेंडर 2014 में 400 रूपये का था वह आज 1000 का आंकड़ा छूने के कगार पर पहुंच गया है। सरकार ने हर चुनाव में जनता से जो जो वायदे किये थे वह कितने पूरे हुये हैं आज देश की जनता इस पर गंभीरता से विचार करने पर पहुंच गयी है। क्योंकि जिस सरकार का व्यवहारिक पक्ष इतना प्रश्नित हो वह किस आधार पर चुनाव में सफलता प्राप्त कर रही है। यह प्रश्न अब और भी उग्रता से उठना शुरू हो गया है जब से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरे प्रमाणिक साक्ष्य के साथ चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाये हैं।
यहां अपने में ही बहुत गंभीर हो जाता है जब चुनाव आयोग जैसी संस्था लगातार सवालो में घिरती जा रही हो और उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब न आये। सवाल चुनाव आयोग पर उठ रहे हैं और जवाब सरकार देने लग गयी है। चुनाव आयोग को लेकर मामले शीर्ष अदालत तक भी जा पहुंचे हैं। लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आ रहा है। ऐसे में आज स्थिति यह बन गयी है कि चुनाव आयोग सरकार और शीर्ष न्यायपालिका सब एक साथ प्रश्नित हो गये हैं। एसआईआर पर हर राज्य में सवाल उठते जा रहे हैं। कई जगहों पर बी एल ओज की आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं लेकिन चुनाव आयोग पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। एक आरटीआई चर्चा में आई जिसमें चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि उसने एस आई आर को लेकर कोई आदेश जारी ही नहीं किये हैं। कर्नाटक में चुनाव आयोग के खिलाफ दर्ज मामला अदालत तक जा पहुंचा है। बिहार चुनाव पर उच्च न्यायालय में मामला जा पहुंचा है कि एक राज्य विधानसभा चुनाव में आचार संहिता को लेकर जो नियम प्रभावी थे वह बिहार चुनाव में प्रभावी क्यों नहीं हुये। बंगाल में ई.डी. के खिलाफ ममता ने एफआईआर दर्ज करवाई है मामला सर्वाेच्च न्यायालय पहुंच गया है।
लेकिन इसी दौरान केरल में आरएसएस के लोगों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ रखने को लेकर मामला दर्ज है। गाजियाबाद में हिंदुत्व के नाम पर खुलेआम तलवारे बांटी गयी। सिकंदराबाद में हिन्दू नेताओं द्वारा एक मुस्लिम बस्ती को खाली करने के आदेश देने का मामला सामने आया है। इन दोनों घटनाओं को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर इन कथित हिन्दू नेताओं को हिरासत में ले लिया है। यह घटनाएं चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने के बाद सामने आने को यह माना जा रहा है कि सरकार पूरे विमर्श को हिंदुत्व का आकार देने का प्रयास कर रही है। इस समय जिस तरह का विमर्श सरकार चुनाव आयोग और शीर्ष अदालत को लेकर बनता जा रहा है उसके परिणाम गंभीर होंगे जिन्हें किसी बुलडोजर न्याय से बदला नहीं जा सकेगा। स्थितियों को पूरी समग्रता में एक साथ रख कर देखना होगा।