Wednesday, 30 September 2026
Blue Red Green
Home देश विमल नेगी मौत प्रकरण में पूर्व एसपी संजीव गांधी को सीबीआई का समन

विमल नेगी मौत प्रकरण में पूर्व एसपी संजीव गांधी को सीबीआई का समन

शिमला/शैल। पावर कॉरपोरेशन के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमय मौत के मामले में जांच कर रही सीबीआई ने शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें छः मार्च को दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सीबीआई कार्यालय में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया था। जानकारी के अनुसार यह समन दो मार्च को भेजा गया था।
मामले की जांच कर रहे सीबीआई के डीएसपी ब्रिजेंद्र प्रसाद सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता बीएनएसएसद्ध की धारा 179 के तहत यह समन जारी किया। समन में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि संजीव गांधी इस मामले की परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं, इसलिए जांच के दौरान उनसे कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर लिए जाने आवश्यक हैं।
सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108, 3(5) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित मामला दर्ज कर रखा है। हालांकि अब तक इस मामले में जांच एजेंसी की ओर से कोई बड़ा खुलासा सामने नहीं आया है, जिससे मामले की जांच को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।
इस प्रकरण में पावर कॉरपोरेशन के पूर्व निदेशक (इलेक्ट्रिकल) देशराज को आरोपी बनाया गया है। उनकी जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत में सीबीआई अधिकारियों को कड़ी फटकार का सामना भी करना पड़ा था। अदालत ने जांच की धीमी प्रगति और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने पर नाराजगी जताई थी।
गौरतलब है कि 10 मार्च 2025 को विमल नेगी शिमला से बिलासपुर के लिए रवाना हुए थे, जिसके बाद वह अचानक लापता हो गए थे। कई दिनों तक उनकी तलाश जारी रही और अंततः 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर जिले के शाहतलाई क्षेत्र में एक दरिया से बरामद हुआ था। इस घटना ने प्रदेश भर में सनसनी फैला दी थी। मृतक के परिजनों ने शुरुआत से ही इसे आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला बताया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
शुरुआत में इस मामले की जांच शिमला पुलिस ने की थी। उस समय के एसएसपी संजीव गांधी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन मामले में स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया।
मामले ने बाद में राजनीतिक रूप ले लिया था। विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और सरकार पर मामले की निष्पक्ष जांच कराने का दबाव बनाया। वहीं मृतक के परिजनों ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) ओंकार शर्मा और तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों ने पावर कॉरपोरेशन से जुड़े कई पहलुओं को उजागर किया था। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया था।
विशेष रूप से डीजीपी अतुल वर्मा की रिपोर्ट में पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को सीबीआई के सुपुर्द करने के आदेश जारी कर दिए थे।
सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद कई अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की है। इस मामले में पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हरीकेश मीणा का नाम भी चर्चा में रहा है, जो वर्तमान में खेल विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं पूर्व एसपी संजीव गांधी को समन जारी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जांच के अगले चरण में सीबीआई किन निष्कर्षों तक पहुंचती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Add comment


Security code
Refresh

Facebook



  Search