शिमला/शैल। शिमला में मास्टर गेम्स एसोसिएशन शिमला ईकाई का गठन विनोद कुमार महासचिव भारती़य मास्टर गेम्स फेडरेशन की अध्यक्षता में किया गया। सभा में विभिन्न खेलों के प्रतिनिधियों व जिला शिमला से विशिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा में जिला शिमला की कार्यकारिणी का गठन किया गया जिसमें चीफ पैटर्न डा. ए.एस.चन्देल, अध्यक्ष अशोक ठाकुर व उपाध्यक्ष पंकज डढवाल, उपाध्यक्ष सुरेश ठाकुर, नरेन्द्र कुमार, बलदेव सिंह ठाकुर व डाॅ. सुनील आंगरा, महासचिव रविन्द्र कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव रंजीत शर्मा, वीरेन्द्र सिंह जसवाल, कोषाध्यक्ष एम.आर.शारदीय, मनोज मन्ढोत्रा को प्रैस सचिव की जिम्मेवारी सौंपी गई।
इस अवसर पर सोहन लाल पूर्व विधायक कुसुम्पटी क्षेत्र व डा. मस्त राम शर्मा को स्थायी रूप से आमंत्रित सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है। अन्य सभी सदस्यों को उनके खेल से सम्बन्धित विभाग का कोआर्डिनेटर लगाया गया जिसमें संतोष कुमार बालीवाल, चमन लाल हाॅकी, अजय कुमार वेट लिफ्टिंग तथा अखिलेश सैनी को टेबल टेनिस की जिम्मेवारी सौंपी गई।
मास्टर गेम्स एसोसिएशन का उद्देश्य 28 खेलों में 30 वर्ष की आयु से अधिक के खिलाड़ियों को खिलाना है। इस बैठक में खिलाड़ी अजय कुमार, शिवलोचन, सुरेश ठाकुर, मनोज कुमार, गौरव कुमार,, जोध सिंह, नरेन्द्र शर्मा, रंजीत शर्मा, कपिल चैहान, बलदेव सिंह व अरूण पारिक उपस्थित रहे। बैठक में यह बताया गया कि 6 जनवरी से बिलासपुर में आयोजित की जाने वाली राज्य स्तरीय मास्टर गेम्स में जिला शिमला की टीम भाग लेगी जिनका चयन खेल विभाग के कोर्डिनेटर करेंगे और फरवरी माह में अखिल भारतीय मास्टर गेम्स का आयोजन देहरादन में करवाया जायेगा जिसमें प्रदेश की विभिन्न टीमें भाग लेंगी।
शिमला/शैल। जब भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा ध्वजवाहक संरक्षक होने का दावा करने वाली सरकार ही ग्रेट खली के उस आयोजन की आयेजक होने का प्रयास करे जिसे स्वयं सिने जगत की आईटम गर्ल राखी सावंत के अश्लील डांस के सहारे प्रमोट करने की जरूरत पड़े तो ऐसे आयोजन पर संघ का संज्ञान लेना आवश्यक हो जाता है। इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया में भी कुछ समय से प्रश्नात्मक प्रतिक्रियाएं उभर रही थी। छोटी काशी के नाम से पहचाने जाने वाले नगर मण्डी में हो रहे इस आयोजन को भारतीय संस्कृति के मानकों के विपरीत करार देते हुए इसे
अश्लीलता और भद्देपन की संज्ञा दी गयी है। संघ ने महिलाओं के पहरावे में भी आते जा रहे नंगेपन को कभी स्वीकृति नही दी है। इस बारे में संघ भाजपा के कई नेताओं के ब्यानों पर विवाद भी उभरे हैं। भारतीय संस्कृति के मानकों पर जब वैलेनटाइन डे तक का विरोध किया जाता है और लैला मजनू चलन को रोकने के लिये विशेष दस्ते बनाए गये हैं तो वहां पर इन्ही का एक वर्ग अश्लील डांस की स्वीकृति दे तो ऐसे विरोधाभास पर संघ नेतृत्व द्वारा संज्ञान लिया जाना स्वभाविक है। इस अश्लील डांस पर सोशल मीडिया में उभरी प्रतिक्रियाओं को संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर के राजनीतिक सलाहार त्रिलोक जम्वाल से एक पोस्ट शेयर करते हुए अपनी चिन्ता जता दी है।
खली द्वारा आयोजित किया जा रहा रेसलिंग शो खेलों की अधिकारिक सूची में नही आता है। प्रदेश के खेल विभाग के नियमों के मुताबिक प्रशासन इसके आयोजन के लिये सरकारी धन उपलब्ध नही करवा सकता है। यह तथ्य मुख्यमन्त्री और खेल मन्त्री के संज्ञान में रिकॉर्ड पर ला दिया गया था। इसके बावजूद इसमें कोई रास्ता निकालने के प्रयास के लिये प्रशासन पर काफी दबाव रहा है। खली स्वयं कुछ अधिकारियों से मिला। पूरा मामला मन्त्रीमण्डल की बैठक में भी लाया गया लेकिन कोई अन्तिम फैसला नही हो पाया। इस आयोजन के लिये चार करोड़ से अधिक की आवश्यकता थी। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमन्त्री और खेल मन्त्री इस आयोजन के लिये खली को अपनी वचनबद्धता दे चुके थे। मुख्यमन्त्री की वचनबद्धता भंग न हो पाये इसके लिये आयोजन का आवश्यक धन जुटाने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव और प्रधान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने संभाली थी। जिन विभागों का जनता से सीधा वास्ता पड़ता है उनके अधिकारियों से बैठके की गयी और बड़े अधिकारियों ने इस दिशा में ईमानदारी से प्रयास भी किये हैं। लेकिन इन प्रयासों से कितना धन इकट्ठा हो पाया है यह अभी तक सामने नही आ पाया है। वैसे तो इस आयोजन के लिये अति उत्साह दिखा रहे आयोजकों का दावा था कि इस आयोजन के लिये बिकने वाले टिकटों से ही इतना पैसा इकट्ठा हो जायेगा कि आयोजन का खर्चा निकालने के बाद शेष बचे धन को मुख्यमन्त्री राहत कोष मे दिया जायेगा लेकिन जिस तरह से आयोजन के टिकट बिक पाये हैं उससे पूरा खर्चा निकाल पाना भी संभव नही माना जा रहा है। ऐसे में सरकारी तन्त्र अप्रत्यक्षतः कितना सहयोग दे पाता है इस पर आयोजन की सफलता निर्भर करेगी जबकि अब खली ने ये भी कह दिया है कि वह इस खेल में न स्वयं भाग लेंगे और न ही विदेशी महिला खिलाड़ी।
दूसरी ओर संघ ने अपने एतराज से मुख्यमन्त्री को उनके सलाहकार के माध्यम से अवगत करवा दिया है। मुख्यमन्त्री इस आयोजन में दोनो जगह मण्डी और सोलन मे मुख्य अतिथि होने का वायदा कर चुके हैं ऐसे में जब स्टेज से राखी सावंत आदि का डांस दर्शकों को परोसा जायेगा तो उस पर बाद में संघ की क्या प्रतिक्रिया रहती है उस पर अभी से लोगो की निगाहें लग गयी है। संघ के संज्ञान के बाद जयराम के कितने मन्त्री और अधिकारी तथा केन्द्रिय मन्त्री इस आयोजन के दर्शक बन पाते हैं इस पर भी सबका ध्यान रहेगा।
शिमला/शैल। क्रिकेट जितना लोकप्रिय खेल बन चुका है इसमें उसी अनुपात में सट्टेबाजी खिलाडीयों की निलामी, मैच फिक्सिंग जैसे अवगुण भी आ चुके हैं। इन सबके साथ इस खेल का नियन्त्रण एकदम राजनेताओं के कब्जे में चला गया है। बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि आज हर खेल पर राजनेताओं का कब्जा हो गया है। इसमें हर छोटा- बड़ा राजनीतिक दल एक बराबर संलिप्त है। इस संलिप्ंतता का परिणाम हैं कि संसद से लेकर राज्य विधान सभाओं तक राजनीतिक दल खिलाड़ियों को टिकट देकर चुनावों में उतार रहे हैं। खेलों पर राजनेताओं का कितना नियन्त्रण हो इसको लेकर एक लम्बे अरसेे से चिन्ता और चिन्तन चल रहा है। इसी के परिणामस्वरूप क्रिकेट को लेकर मुदगल केमटी और फिर लोढ़ा कमेटी का गठन हुआ। आज सर्वोच्च न्यायालय लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को अमली शक्ल देेने के लिये पूरीे तरह प्रतिबद्ध नजर आ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के इस प्रयास पर देश के किसी भी कोने से किसी भी खिलाडी या खेल प्रेमी ने कोई एतराज नहीं उठाया है।
लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के इस प्रयास पर देश में क्रिकेट की सर्वोच्च संचालन संस्था बीसीसीआई ने जिस तरह
का स्टैण्ड लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर सर्वोच्च अदालत के सामने लिया है उससे सर्वोच्च न्यायालय और बीसीसी आई में टकराव की स्थिति बेहद संगीन हो गयी है। क्योंकि बीसीसी आई ने शपथ पत्र के माध्यम से जो कुछ सर्वोच्च न्यायालय में कहा है। वह पूरी तरह तथ्यों के विपरीत गंभीर गल्तब्यानबाजी बन गया है। यह शपथ पत्र सर्वोच्च न्यायालय में बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के हस्ताक्षर से दाखिल हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस गल्तब्यानी का कड़ा संज्ञान लिया है। इसके लिये अनुराग ठाकुर को सर्वोच्च न्यायालय से व्यक्तिगत स्तर पर बिना शर्त माफी मांगने की नौबत आ गयी है अन्यथा इसका परिणाम गंभीर हो सकता है। क्योंकि स्टैण्ड अलग होना और तथ्यों की गलत जानकारी देना दो अलग-अलग विषय है। यह मामला तथ्यों की गलत जानकारी का बन गया है। इसमें माफी मांग कर वह बच जायेंगे लेकिन उनके विरोधी इस माफी का पूरा-पूरा राजनीतिक लाभ उठायेंगे।
बल्कि अब जिस ढंग से अमित शाह ने राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति तथा किसान मोर्चाओं के अध्यक्ष बदले हैं उन्ही के साथ युवा मोर्चा अध्यक्ष भी बदला गया है। लेकिन अनुराग के विरोधी इस बदलाव को भी राजनीति के आईने से देख रहे हैं। क्योंकि अभी जब अमितशाह पार्टी के त्रिदेव सम्मेलन के लिये सोलन आये थे तब उन्हें मंच से भाषण का अवसर नही मिल पाया था। इस अवसर न मिलने और उसके चार दिन बाद ही युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद से उस समय छुट्टी हो जाना जब वह सर्वोच्च न्यायालय की एक प्रकार से प्रताड़ना झेल रहे थे। बीसीसीआई का शपथ पत्रा तथ्यों की गल्तब्यानी कैसे बन गया इसके लिये क्रिकेट बोर्ड के अन्दर क्या घटा है या फिर यह बोर्ड के किसी अधिकारी की गल्ती से हो गया है यह सारेे खुलासे तो आगे चलकर बाहर आयेंगे। लेकिन इस समय इसकी गाज अकेले अनुराग को ही झेलनी होगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने क्रिकेट को लेकर लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर जिस तरह के रूख के संकेत दिये हैं। उससे स्पष्ट हो गया है कि क्रिकेट के सर्वोच्च प्रबन्धन में अब बदलाव अश्वय देखने को मिलेगा। सर्वोच्च न्यायालय के संकेत को समझते हुए अब शरद पवार ने महाराष्ट्र क्रिकेट बोर्ड से त्यागपत्र दे दिया है। ऐसे में अब यह माना जा रहा है कि अभी अनुराग के लिये भी क्रिकेट या राजनीति में से एक का चयन करने की बाध्यता आ जायेगी। राजनीतिक विश्लेष्कों के मुताबिक क्रिकेट को राजनेताओं के दखल से मुक्त करने की जो कवायद अब शुरू हो गयी है इसके दूरगामी परिणाम होंगे। इसमें खेल और राजनीति दोनों का साथ-साथ चलना संभव नही रह पायेगा। ऐसे में आज यदि अनुराग प्रदेश की राजनीति की ओर रूख करने का फैसला लेते हैं तोे जो अनुभव इस समय उनकेे पास है उससे वहअपने विरोधियों पर भारी पड़ सकते हैं और राजनीति में एक लम्बी पारी खेल सकते हैं।
इस समय अनुराग की इन परिस्थितियों पर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मुख्यमन्त्री के बेटे विक्रमादित्य ने जिस ढ़ंग से आक्रामकता दिखायी है उसके जवाब में भाजपा और अनुराग के शुभ चिन्तक कमजोर सिद्ध हुए हैं। विक्रमादित्य की इस आक्रामकता को भाजपा के भीतर बैठे अनुराग विरोधियों का भी अपरोक्ष समर्थन हालिस हो सकता है। इस समय यदि अनुराग इस उभरती आक्रामकता का उसी स्वर में जवाब न दे पायेे तोे आने वाले समय में कठिनाईयां बढ़ सकती है।