नड्डा के हिमाचल दौरे ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मियां, क्या 2027 की तैयारी शुरू?
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Created on Thursday, 25 June 2026 12:26
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का दो दिवसीय शिमला दौरा चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। आधिकारिक तौर पर यह दौरा संगठनात्मक और विभिन्न कार्यक्रमों में भागीदारी तक सीमित बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और विभिन्न वर्गों के लोगों से उनकी मुलाकातों ने इस चर्चा को और हवा दी है कि कहीं न कहीं 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।
शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या वह भविष्य में दिल्ली की राजनीति छोड़कर हिमाचल की सक्रिय राजनीति में आने की तैयारी कर रहे हैं, तो उन्होंने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। नड्डा ने स्पष्ट कहा कि उनका वर्तमान दायित्व राष्ट्रीय स्तर पर है और वह दिल्ली में ही अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल में भाजपा के पास जयराम ठाकुर जैसा नेतृत्व मौजूद है और भविष्य की परिस्थितियां समय के साथ तय होंगी।
दौरे के दौरान एक और दिलचस्प सवाल उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर उठा। उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पत्नी या पुत्र भविष्य में राजनीति में प्रवेश करेंगे। इस पर नड्डा ने कहा कि फिलहाल वह स्वयं ही पर्याप्त हैं और परिवार के किसी अन्य सदस्य को राजनीति में लाने का कोई विचार नहीं है। उनके इस बयान को भी राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने परिवारवाद की राजनीति से दूरी का संदेश देने का प्रयास किया।
नड्डा के इस दौरे में कई वरिष्ठ भाजपा नेता उनके साथ दिखाई दिए। हालांकि सबसे अधिक चर्चा पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज की अनुपस्थिति को लेकर रही। शिमला भाजपा की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले सुरेश भारद्वाज इस दौरे में नजर नहीं आये। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे सामान्य संयोग मानने के बजाय स्थानीय नेतृत्व की अंदरूनी रणनीतियों से जोड़कर देख रहे हैं।
दरअसल, सुरेश भारद्वाज पिछले कुछ समय से शिमला में लगातार सक्रिय हैं और माना जा रहा है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद की संभावित दावेदारी को लेकर मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा और शिमला सहित विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।
ऐसे में जगत प्रकाश नड्डा का यह दौरा केवल एक औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व, संगठनात्मक समीकरणों और 2027 की चुनावी रणनीति को लेकर नए संकेत छोड़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नड्डा भले ही हिमाचल की राजनीति में सीधे आने से इन्कार कर रहे हों, लेकिन उनके दौरे ने यह संदेश अवश्य दिया है कि भाजपा आगामी चुनावों की तैयारी समय से पहले शुरू कर चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में हिमाचल भाजपा की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में कौन-कौन से चेहरे उभरकर सामने आते हैं।
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