घोषणाओं से आगे कब बढ़ेगा रोजगार का मुद्दा?
- Details
-
Created on Monday, 17 August 2026 06:33
-
Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल में बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों की जरूरत लगातार बनी हुई है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने घुमारवीं में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी कई घोषणाएं की हैं। इनमें जल शक्ति विभाग के 4,000 पद भरने के साथ आने वाले समय में 4,000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा प्रमुख है। सवाल यह है कि इन घोषणाओं का लाभ युवाओं को कब तक मिलेगा।
सरकार की ओर से बताया गया कि अब तक 6,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं और 4,000 और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। लेकिन प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा लंबे समय से सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में नई भर्तियों की घोषणा के साथ उनकी नजर अब भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और नियुक्तियां मिलने पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार काम कर रही है। घुमारवीं में राजकीय महाविद्यालय में एमबीए, एमसीए और एमटीए की कक्षाएं शुरू करने तथा घंडावली कॉलेज में बीबीए और बीसीए की कक्षाएं शुरू करने की घोषणा भी की गई। इन पाठयक्रमों से युवाओं को उच्च शिक्षा के नए विकल्प मिलेंगे, लेकिन शिक्षा के बाद रोजगार की गारंटी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रोजगार का आधार बनाने की बात भी कर रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्राकृतिक खेती से हल्दी की खेती करने वाला किसान एक बीघा जमीन से सालाना एक लाख रुपये तक कमा सकता है। इसके अलावा ई-टैक्सियों और बसों के लिए सब्सिडी जैसी योजनाओं के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने का दावा किया गया है।
लेकिन हिमाचल के युवाओं की सबसे बड़ी मांग नियमित और स्थायी रोजगार की है। आउटसोर्स और अस्थायी रोजगार के साथ युवाओं को लंबे समय तक भविष्य की सुरक्षा नहीं मिलती। सरकार ने खुद कई मौकों पर आउटसोर्स और मल्टी-टास्क कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर नीति बनाने की बात कही है। ऐसे में नई भर्तियों की घोषणाओं को जमीन पर उतारना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के तहत प्रदेश में 156 से अधिक सीबीएसई स्कूल खोलने और राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल बनाने की बात भी कही। शिक्षा में निवेश जरूरी है, लेकिन इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब युवाओं को बेहतर शिक्षा के साथ रोजगार के पर्याप्त अवसर भी मिलें।
घुमारवीं में वन मित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने की घोषणा भी की गई। यह राहत जरूर है, लेकिन यह नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं है। इसी तरह स्वरोजगार योजनाएं युवाओं को कुछ अवसर दे सकती हैं, लेकिन हर बेरोजगार युवा के लिए स्थायी समाधान नहीं बन सकती।
सरकार का दावा है कि वह रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार कर रही है। दूसरी ओर युवाओं के सामने सवाल वही है घोषित पदों पर भर्ती कब शुरू होगी, परीक्षा कब होगी और नियुक्ति कब मिलेगी? हजारों युवाओं के लिए रोजगार केवल घोषणा नहीं, बल्कि समयबद्ध भर्ती और नियुक्ति का विषय है।
इसलिए सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नई घोषणाएं करना नहीं, बल्कि पहले से घोषित भर्तियों को तय समय में पूरा करना है। 4,000 शिक्षकों और 4,000 जल शक्ति विभाग के पदों की भर्ती यदि पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो इससे बेरोजगार युवाओं को वास्तविक राहत मिल सकती है। वरना रोजगार की घोषणाएं भी सरकारी घोषणाओं की लंबी सूची में जुड़कर रह जाएंगी।
Add comment