नई दिल्ली।। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में खींचतान का दौर तेज होता दिख रहा है। उत्तराखंड में कांग्रेस भले ही शांत नजर आ रहा हो, लेकिन अंदर ही अंदर सियासी तापमान गरमा रहा है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को हटाए जाने की आहट के बीच उन्होंने अपने लिए लॉबइंग भी तेज कर दी है।
उत्तराखंड के 22 विधायकों ने सोनिया गांधी का चिट्ठी लिखकर कहा है कि विजय बहुगुणा सरकार अच्छा काम कर रही है। इन्होंने लिखा है कि हमें हरीश रावत मुख्यमंत्री के तौर पर मंजूर नहीं हैं।
सोनिया गांधी को ये चिट्ठी 11 जनवरी को लिखी गई थी। इस चिट्ठी से साफ है कि सीएम कुर्सी तक पहुंचने की हरीश रावत की राह आसान नहीं है।
उत्तराखंड त्रासदी के बाद से ही विजय बहुगुणा सवालों के घेरे में हैं। आपदा के बाद बहुगुणा के रवैये और राहत कार्यों में नाकामी के बाद बहुगुणा को हटाए जाने की चर्चा चलती रही है। पिछले कुछ दिनों में इस चर्चा ने और जोर पकड़ा है। इसे लेकर दिल्ली में मीटिंग का दौर भी चला है।
कल ही हरीश रावत ने साफ कर दिया था कि अगर उन्हें उत्तराखंड के सीएम पद की जिम्मेदारी दी जाती है तो वो इसके लिए तैयार हैं। फिलहाल रावत केंद्रीय जल संसाधन मंत्री है और सीएम पद के प्रबल दावेदार रहे हैं।
नई दिल्ली।। सीबीआई को 60 कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कोई भी गड़बड़ी नहीं मिली है और उम्मीद है कि वह उन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद जांच के दायरे से बाहर कर देगी।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इसका उस जांच की स्टेटस रिपोर्ट में उल्लेख किया जाएगा, जिसे एजेंसी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर करने वाली है।
सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने रिकार्डों का विस्तृत विश्लेषण किया और यह निष्कर्ष निकाला है कि इन कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कोई भी अपराध नहीं हुआ है। यद्यपि इस बारे में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही किया जाएगा कि उन्हें उसकी जांच के दायरे से बाहर करना है या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक 195 कोयला ब्लॉकों के आवंटन की जांच की जा रही है, जिसमें से सीबीआई को 16 मामलों में प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री मिली है जो धोखाधड़ी, आपराधिक दुराचरण और भ्रष्टाचार की ओर इंशारा करती है, जिसके बाद एजेंसी ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। इसके बावजूद 60 कोयला ब्लाकों के आवंटन के विश्लेषण के दौरान रिकार्ड सही पाए गए और तय नियमों और प्रक्रियाओं से कोई भी विचलन नहीं मिला।
सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान एजेंसी ने राज्य सरकारों की रिपोर्ट, दिलचस्पी रखने वाले मंत्रालयों, छानबीन समिति के ब्योरे और लाभ उठाने वाली कंपनियों की ओर से जमा किए गए फॉर्म और दस्तावेजों का विश्लेषण किया।
सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने इन कंपनियों के कुछ अधिकारियों को भी बुलाया और वे सीबीआई जांच दल द्वारा उठाए गए सभी सवालों को समझाने में सफल रहे।
पथिक संवाददाता
मुंबई, 31 दिसंबर : राज्य सरकार के आदेश और पुलिस के रवैए में विरोधाभासी रुख नजर आने से मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे सहित राज्य के हजारों होटल, रेस्टॉरेंट और बार मालिकों में समय अवधि को लेकर असमंजस पैदा हो गया है. राज्य सरकार ने नए वर्ष के अवसर पर होटलों और खानपान गृहों को सवेरे 5 बजे तक खुला रखने का निर्देश जारी किया है. इसमें यह भी कहा गया है कि होटल और रेस्टॉरेंट देर तक चलाने के लिए पुलिस से आवश्यक अनुमति लेनी पड़ेगी. वहीं दूसरी ओर मुंबई पुलिस ने फरमान जारी किया है कि नव वर्ष के अवसर पर कोई भी होटल, रेस्टारेंट 1.30 बजे रात के बाद बंद रहेंगे. इस विरोधाभासी रवैए के कारण होटल मालिक दुविधा में हैं. जबकि उनके ग्राहकों की मांग को वे पूरा करना चाहते हैं. यही कारण है कि मुंबई के होटल मालिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
मुंबई पुलिस का कहना है कि नए वर्ष के अवसर पर कानून व्यवस्था और महिलाआें की सुरक्षा के लिए देर रात तक होटल या रेस्टॉरेंट चलाना उचित नहीं है. इसलिए 1.30 बजे तक होटल खुला रखने की अनुमति दी है. इसी तरह नवी मुंबई और ठाणे में मुंबई पुलिस की तरह का कोई फरमान नहीं है. इसलिए वहां के होटल मालिक समझ रहे हैं कि सरकारी निर्देश के अनुसार सवेरे 5 बजे तक वह अपनी दुकान चला सकते हैं. नवी मुंबई के जोन-1 के उपायुक्त पुरुषोत्तम कराड ने कहा है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में डेढ़ बजे वाली डेडलाइन का कोई नोटिस जारी नहीं किया है. उधर ठाणे के पुलिस आयुक्त के पी रघुवंशी का कहना है कि उन्होंने 5 बजे सवेरे तक होटल खुला रखने की कोई
अनुमति नहीं दी है. वे डेढ़ बजे रात वाला डेड लाइन पालन करने का निर्देश अपने विभाग को दे चुके हैं.
इस तरह से नववर्ष पर होटलों की डेड लाइन को लेकर असमंजस की स्थिति है. उधर होटल मालिकों का कहना है कि समय मर्यादा का पालन न करने पर बेमतलब कानूनी दावपेंचों में उलझना पड़ सकता है. इसलिए उन्होंने अदालत में गुहार लगाई है. फिर भी पुलिस ने नए वर्ष के अवसर पर शांति व्यावस्था बनाए रखने और महिलाआें की सुरक्षा के व्यापक व्यवस्था की है. मुंबई में कम से कम 25000 पुलिसवाले तैनात किए गए हैं. इसके साथ-साथ महिला गश्तीदल को भी होटलों व पार्टी स्थलों पर निगरानी के लिए लगाया गया है. यह व्यावस्था बुधवार देर तक जारी रहेगी. फिलहाल गेटवे ऑफ इंडिया चौपाटी सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर निगरानी तेज कर दी गई है.
होटल खोलने के समय को मर्यादित करने से होटल उद्योग को 500 करोड़ रु. का नुकसान होगा और सरकार को 150 करोड़ का राजस्व नुकसान होगा. यह जानकारी होटल रेस्टारेंट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कमलेश बारोट ने दी है. उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कहती है और जब अवसर आता है तो दबाव तंत्र अपनाती है. उधर होटल मालिकों के संगठन आहार ने अपील की है कि वह डेढ़ बजे रात की डेड लाइन को शिथिल कर दें.
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