तीन साल की बजट घोषणाएं जमीन पर उतारने में नाकाम रही सरकारःजयराम
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Created on Thursday, 19 March 2026 18:03
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल में बजट में की गई कई अहम घोषणाओं को जमीन पर उतारने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को चौथा बजट पेश करने से पहले पिछली तीनों बजट घोषणाओं का हिसाब प्रदेश की जनता को देना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहले बजट में कई बड़े वायदे किए थे, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी इनमें से अधिकांश योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पायी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी रैलियों की तरह ही विधानसभा में भी घोषणाएं कर रही है, जबकि बजट में की गई घोषणाओं को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले बजट में 20 हजार मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस योजना का कोई उल्लेख तक नहीं किया जा रहा है। इसी तरह प्रदेश में छः ग्रीन कॉरिडोर बनाने की घोषणा भी अभी तक अमल में नहीं लायी गयी। इसके उलट सरकार ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग पर छः रुपये प्रति यूनिट का एनवायरमेंट सैस लगा दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोलने और चंबा, नाहन तथा हमीरपुर में पेट स्कैन सुविधा शुरू करने की घोषणाएं भी अब तक फाइलों में ही दबी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, बागवानों, खिलाड़ियों, महिलाओं और जनजातीय क्षेत्रों के लिए की गई कई छोटी-छोटी घोषणाएं भी लागू नहीं हो पायी हैं। युवाओं के लिए रोजगार और स्वावलंबन से जुड़ी योजनाएं भी कागजों तक सीमित रह गई हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार ने तीन वर्षों में करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है। इसके अलावा सरकार ने इस अवधि में 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी लिया है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े बजट और भारी कर्ज के बावजूद यदि बजट में घोषित योजनाएं तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो पायी हैं, तो यह सरकार की नीति, नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जब बजट में योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया था तो उनकी शुरुआत क्यों नहीं हुई और उनके लिए आवंटित धन आखिर कहां खर्च हुआ।
इस बीच जयराम ठाकुर ने राज्य सतर्कता विभाग और एंटी करप्शन ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के फैसले पर भी कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही कमजोर होगी। साथ ही प्रदेश में एंट्री टैक्स बढ़ाने के फैसले को भी उन्होंने जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे सीमावर्ती जिलों के लोगों और पर्यटन कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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