Thursday, 15 January 2026
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अव्यवस्था से गहराता स्वास्थ्य संकटःजयराम

शिमला/शैल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को चरमराई हुई बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाये हैं। शिमला से जारी बयान में उन्होंने कहा कि केवल जुबानी दावों और कागजी योजनाओं से न तो स्वास्थ्य सेवाएं सुधर सकती हैं और न ही मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकता है। मौजूदा हालात में प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेशवासियों को न तो केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित स्वास्थ्य योजनाओं का समुचित लाभ मिल पा रहा है और न ही राज्य सरकार अपनी योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन कर पा रही है। कागजों में योजनाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। पूरे प्रदेश में मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। डॉक्टरों, नर्सों, तकनीकी कर्मियों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के अनेक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इन्हें भरने के बजाये केवल घोषणाओं और आंकड़ों तक सीमित है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अस्पतालों में न पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं, न जरूरी उपकरण और न ही समय पर दवाइयों की आपूर्ति हो पा रही है। इससे मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है।
आईजीएमसी शिमला में हाल ही में हुई मारपीट की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि यह घटना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चेतावनी है। अस्पतालों में अव्यवस्था, अत्यधिक भीड़, सुरक्षा व्यवस्था की कमी, कार्यभार का दबाव और प्रशासनिक लापरवाही ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस घटना से सबक लेते हुए केवल ब्यानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
जयराम ठाकुर ने मांग की कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे, तुरंत खाली पदों को भरे, अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करे और दवाइयों व उपकरणों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे। साथ ही उन्होंने कहा कि हिमकेयर और आयुष्मान भारत सहित केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेशवासियों को प्रभावी और निर्बाध रूप से मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये योजनाएं गरीब, मध्यम वर्ग और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवन रक्षक हैं, लेकिन वर्तमान में लापरवाही और अव्यवस्था के कारण आम जनता को इनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए मरीजों को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और केंद्र से बजट मिलने के बावजूद कई आवश्यक दवाएं मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

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