Thursday, 15 January 2026
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आसान नहीं होगा भाजपा को राज्यसभा में खेला करना

शिमला/शैल। क्या इस बार भी राज्यसभा चुनाव में प्रदेश भाजपा सुक्खू सरकार और कांग्रेस को झटका दे पायेगी? यह सवाल पिछले कुछ समय से चर्चा में चल रहा है। क्योंकि भाजपा के कुछ नेताओं के ऐसे बयान सामने आये हैं। इसी के साथ कांग्रेस ने सत्ता के तीन साल पूरे होने पर जिस तरह की रैली का आयोजन मंडी में किया और उसमें जिस तरह की बयानबाजी कांग्रेस नेताओं की रही तथा इस आयोजन से जिस तरह की दूरी स्व. वीरभद्र खेमे से जुड़े नेताओं ने बनाई उससे अनचाहे ही यह संदेश और संकेत चले गये कि कांग्रेस में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। लेकिन इसी के साथ यह भी चर्चा में आ गया कि भाजपा ही प्रदेश में कई गुटों में बंटी हुई है। यह सही है कि इस समय प्रदेश भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे जगत प्रकाश नड्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे अनुराग ठाकुर तीन बड़े चेहरे हैं। इन्हीं के साथ कांग्रेस से भाजपा में गये नेताओं का अपना ही एक गुट परिस्थितियों के कारण बन गया है। क्योंकि जब इन नेताओं के पासा बदलने के कारण कांग्रेस राज्यसभा चुनाव हार गयी तब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह और यह नेता एक दूसरे के खिलाफ सीधी लड़ाई में आ गये। कांग्रेस से भाजपा में गये यह नेता आज तक मुख्यमंत्री के साथ सीधे टकराव में चल रहे हैं। इस टकराव में भाजपा के मूल नेता संयोगवश आज तक दूरी ही बनाये हुये हैं। ऐसे में यह स्थितियां बनी हुई है कि मुख्यमंत्री सुक्खू जहां कांग्रेस में अकेले इन नेताओं से भिड़े हुये हैं वहीं पर भाजपा में जगत प्रकाश नड्डा और अनुराग ठाकुर भी इस टकराव में तटस्थता ही बनाये हुये चल रहे हैं। कांग्रेस से भाजपायी बने इन नेताओं के साथ अभी तक जयराम ठाकुर के अतिरिक्त और किसी अन्य भाजपा नेता का बड़ा योगदान नहीं रहा है। जयराम ठाकुर ने ही पिछले दिनों यह मुद्दा उठाया है कि कांग्रेस से भाजपा में आये नेताओं और उनके परिजनों के खिलाफ सुक्खू व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे हैं। जयराम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सत्ता बदलने के बाद उनके साथ भी इसी तरह का व्यवहार होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के कौन-कौन नेता सुक्खू सरकार के खिलाफ पूरी प्रमाणिकता के साथ हमलावर होते हैं। इस समय जगत प्रकाश नड्डा और अनुराग ठाकुर सुक्खू सरकार के खिलाफ रस्मी विरोध से ज्यादा नहीं बढ़ रहे हैं। बल्कि जिस तरह का हमला विक्रम ठाकुर सुक्खू सरकार के खिलाफ बोलते रहे हैं उसको भी नड्डा और अनुराग ने ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया है। बल्कि भाजपा नेताओं के कारण इस समय सारी लड़ाई केन्द्र सरकार के प्रदेश को आर्थिक सहयोग के गिर्द ही केंद्रित होकर रह गयी है और इसमें राज्य सरकार का पक्ष ज्यादा कमजोर नहीं है। इस परिदृश्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेता किस तरह की आक्रामकता सुक्खू सरकार के खिलाफ अपनाते हैं। इसमें यह देखना भी रोचक होगा कि मुख्यमंत्री सुक्खू और उनकी टीम केन्द्र सरकार और संघ के खिलाफ कितनी प्रामाणिकता के साथ हमलावर होते हैं। यदि कांग्रेस के आक्रमण में किसी तरह की कमी रहती है तभी भाजपा राज्यसभा चुनाव में खेला कर पायेगी अन्यथा नहीं। क्योंकि भाजपा में नड्डा अनुराग और जयराम सबकी नज़रें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है ऐसे में उनके हितों में टकराव होना स्वभाविक है।

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