शिमला/शैल। क्या कांगड़ा केन्द्रीय सहकारी बैंक धर्मशाला के पूर्व एमडी और वर्तमान प्रशासक एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुई धोखाधड़ी की एफ.आई.आर प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े तूफान का संकेत है? यह सवाल इसलिये प्रसांगिक हो जाता है क्योंकि इस मामले के शिकायत करता युद्ध चन्द बैंस उस समय चर्चा में आये जब ई.डी और सी.बी.आई. ने हमीरपुर और नादौन में छापेमारी करने के बाद ज्ञानचन्द और संजय धीमान को हिरासत में ले लिया। इस मामले में ज्ञानचन्द तो जमानत पर बाहर आ गये हैं लेकिन संजय धीमान अभी भी जेल में हैं। इस छापेमारी के बाद युद्ध चन्द बैंस ने यह खुलासा किया था कि वह ई.डी. में शिकायतकर्ता है। इस खुलासे के बाद बैंस के खिलाफ प्रदेश विजिलैन्स ने ऊना में उसके ऋण मामले में एफ.आई.आर. दर्ज कर दी। इस एफ.आई.आर. के बाद बैंस का होटल ऋण मामला चर्चा में आ गया। विजिलैन्स की एफ.आई.आर. प्रदेश उच्च न्यायालय में पहुंच गयी। इस मामले में बैंस को उच्च न्यायालय से नियमित जमानत मिल गयी। इसी दौरान यह चर्चा में आया की बैंस से उसके ऋण मामले को सेटल करने के लिये 50 लाख की रिश्वत मांगी गयी और उसकी होटल की जमीन को दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को देने की योजना सामने आयी। इस चर्चा को इसलिये अधिमान मिल गया क्योंकि बैंस ने यह दावा किया कि उसने हर वार्तालाप की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग कर रखी है और यह सब कुछ ई.डी. और विजिलैन्स को सौंप दिया है। बैंस के इस दावे का कहीं से कोई खण्डन नहीं आया है। विजिलैन्स ने उसकी जमानत को सर्वाेच्च न्यायालय में चुनौती दे रखी है। जब बैंस का ऋण मामला चर्चा में आया था तब आदित्य नेगी बैंक के एमडी ने बैंक अधिकारियों से इस मामले में जानकारी मांगी। आदित्य नेगी ने बैंक अधिकारियों को शोकाज नोटिस तक जारी कर दिये। इस पर बैंस ने उसके ऋण मामले में आवश्यक दस्तावेज गायब कर दिये जाने को लेकर पुलिस में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की गुहार लगा दी। पुलिस से उसकी शिकायत पर कार्यवाही न किये जाने पर बैंस ने 156(3) में अदालत का दरवाजा खटखटा दिया। अब अदालत के तेवर देखकर पुलिस ने आठ अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज करके बैंस के ब्यान भी दर्ज कर लिये हैं। आरोप है कि बैंस ने अपने ऋण मामले में जो संपत्ति बैंक के पास गिरवी रखी थी उसकी वैल्यूएशन के दस्तावेज बैंक से गायब हैं। दस्तावेजों का गायब होना बैंस के आरोपों की एक तरह से पुष्टि मानी जा रही है। इस मामले में बैंस पुलिस की धीमी जांच पर प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर इस जांच को सीबीआई को सौंपने की गुहार लगा सकता है। यदि यह मामला जांच के लिये सीबीआई में पहुंच जाता है और दस्तावेजों का गायब होना प्रमाणित हो जाता है तो बैंस द्वारा इस मामले में लगाये गये अन्य आरोप भी स्वतः ही अधिमान पा जाते हैं। क्योंकि बैंस ने हर वार्तालाप की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग करने का दावा कर रखा है। बैंक के मौजूदा प्रशासक और पूर्व में एमडी रहे विनोद कुमार मुख्यमंत्री की विधायक पत्नी कमलेश कुमारी के सहपाठी रहे हैं और इन्हीं के कार्यकाल में कांगड़ा सरकारी बैंक द्वारा देहरा उपचुनावों के दौरान देहरा के महिला मण्डलों को कैश बांटने का आरोप है। इस आरोप की शिकायत राज्यपाल तक भी पहुंची हुई है और प्रदेश उच्च न्यायालय में भी मामला दायर हो चुका है। इस समय जिस तरह का राजनीतिक परिदृश्य राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी बनाम भाजपा होता जा रहा है उसके कारण आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव बढ़ना निश्चित है। इस टकराव का असर कांग्रेस की सरकारों पर पढ़ना तय है। हिमाचल में इस समय भाजपा का हर नेता राहुल गांधी को कोसने पर आ गया है। लेकिन इसके जवाब में हिमाचल में कांग्रेस की परफारमैन्स ‘‘वोट चोर गद्दी छोड़’’ और अब मनरेगा के अभियानों पर कोई ज्यादा कारगर नहीं रही है। ऐसे में यदि बैंस के माध्यम से कांग्रेस सरकार घिर जाती है तो भाजपा इस अवसर का पूरा-पूरा राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करेगी यह तय है।