शिमला/शैल। विमल नेगी प्रकरण में सीबीआई द्वारा अदालत में दायर चार्जशीट को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने चार्जशीट को कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला दस्तावेज बताते हुए कहा कि इसमें सामने आये तथ्य पूरे मामले में सत्ता और प्रशासन की भूमिका पर प्रश्न खड़े करते हैं।
शिमला से जारी बयान में हर्ष महाजन ने कहा कि चार्जशीट में फर्जी कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने, आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर, अधिकारियों पर दबाव बनाने, नियमों की अनदेखी करने और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी द्वारा अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों में ऐसे तथ्य दर्ज हैं तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने का मामला है।
महाजन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार को अब प्रदेश की जनता को बताना चाहिए कि आखिर नियमों को दरकिनार करने के पीछे कौन लोग थे, अधिकारियों पर कथित दबाव किसके निर्देश पर बनाया गया और दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ के आरोपों की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में शुरुआत से ही सच्चाई को दबाने और वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की गई।
भाजपा सांसद ने विशेष रूप से जांच को प्रभावित करने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने से जुड़े आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि साक्ष्यों को प्रभावित करने या रिकॉर्ड में बदलाव करने का प्रयास हुआ है तो यह कानून के शासन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सीधा हमला है। ऐसे मामलों में केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कारवाई कर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि जब-जब विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, तब-तब सरकार ने मामले को हल्के में लेने या उसका राजनीतिक असर कम करने की कोशिश की। अब सीबीआई चार्जशीट ने उन आशंकाओं को और बल दिया है जिन्हें भाजपा लगातार उठाती रही है। महाजन ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि इस पूरे मामले में किन लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया और इसके लिए किस स्तर तक नियमों को नजरअंदाज किया गया।
हर्ष महाजन ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक, राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर जुड़े सभी व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कारवाई की जानी चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या चार्जशीट में सामने आए तथ्यों के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कारवाई की जाएगी या फिर उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा।