Sunday, 30 November 2025
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78वें हिमाचल दिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री का विशेष लेख

संसाधन सृजन व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण से

आत्मनिर्भर बन रहा हिमाचल प्रदेश

ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू
मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश

78वें हिमाचल दिवस की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। देश की आज़ादी के 8 महीनों के बाद सन् 1948 को इस ऐतिहासिक दिवस पर हमारा खूबसूरत प्रदेश 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों के विलय से केन्द्र शासित चीफ कमीशनर प्रोविंस के रूप में अस्तित्व में आया। इसमें उस समय के नेतृत्व के साथ-साथ प्रजामंडल आंदोलन के नायकों, आंदोलनकारियों और प्रदेश की जनता ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज इस पावन अवसर पर मैं हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवन्त सिंह परमार सहित उन महान विभूतियों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूं जिन्होंने हिमाचल प्रदेश को अलग पहचान देने में बहुमूल्य योगदान दिया। मैं इस वीर भूमि के उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों एवं सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। प्रदेश के मेहनती, ईमानदार व शान्तिप्रिय लोगों का विशेष रूप से आभार जिनके निरन्तर प्रयासों से हिमाचल ने देश-विदेश में अपनी खास पहचान बनाई है।
हमारी सरकार ने वर्ष, 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने और वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्धशाली राज्य बनाने का संकल्प लिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद हम अपने संकल्प की पूर्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
राज्य सरकार के हर 100 रुपये में से 42 रुपये कर्मचारियों के वेतन और पेंशन, 11 रुपये कर्ज की अदायगी पर और 10 रुपये कर्ज का मूलधन चुकाने पर खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद, हमने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई महत्त्वपूर्ण बदलाव किए हैं तथा वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए कड़े फैसले लेने में भी संकोच नहीं किया, जिस कारण आर्थिक स्थिति फिर पटरी पर आने लगी है।
विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए 10 वायदों में से 6 वायदों को पूरा कर हम जनता की कसौटी पर खरा उतरने में सफल रहे हैं। शेष चार गारंटियों को भी हम पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हिमाचल प्रदेश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान कर रही है। पहली बार दूध और प्राकृतिक खेती से उगाए गेहंू, मक्की व हल्दी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया है।
प्राकृतिक खेती कर रहे प्रदेश के 1,58,785 किसानों को प्रमाणित किया गया है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोड़ा जाएगा। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए ई-कॉमर्स वैबसाइट शुरू की गई है।
हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि किसानों के हित में कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से एकमुश्त सेटलमेंट नीति लाकर किसानों के मूलधन पर लगने वाले ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी।
हमारी सरकार ने प्राकृतिक पद्धति से उगाई मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये और गेहूं का 40 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो किया हैै। पहली बार प्राकृतिक हल्दी का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार कच्ची हल्दी 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदने जा रही है। हमीरपुर ज़िले में स्पाइस पार्क का निर्माण भी किया जाएगा। आलू की खेती को बढ़ावा देने के लिए ऊना ज़िले में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से आलू प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
इस वर्ष गाय और भैंस के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में फिर से वृद्धि की गई है। हमने गाय के दूध पर समर्थन मूल्य 32 से बढ़ाकर 45 रुपये किया था जिसे अब 51 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इसी तरह, भैंस के दूध पर समर्थन मूल्य 47 से बढ़ाकर 55 रुपये किया गया था, जिसे अब 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। हमने पंजीकृत दूध समितियों को सुदृढ़ करने के लिए परिवहन अनुदान को 1.5 रुपये से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश के सेब बागवानों को लाभान्वित करने के लिए हमारी सरकार ने पिछले वर्ष से यूनिवर्सल कॉर्टन का इस्तेमाल अनिवर्य किया। मंडी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत 153 करोड़ रुपये की देनदारियां भी चुकाई हैं।
हमने 31 मार्च, 2026 तक हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है जिसके लिए सौर परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। हम परिवहन क्षेत्र में ई-वाहन और अधोसंरचना विकास को बड़े स्तर पर प्रोत्साहन दे रहे हैं। चम्बा में प्रदेश के पहले ग्रीन हाईड्रोजन मोबिलिटी स्टेशन का निर्माण कार्य जारी है। सोलन ज़िले के नालागढ़ में एक मेगावाट की ग्रीन हाईड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 6 ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किए जा चुके हैं। 3000 डीजल और पैट्रोल टैक्सी वाहनों को ई-वाहनों से बदलने के लिए 40 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जाएगा।
वन प्रबंधन तथा वन विस्तार में महिला एवं युवक मंडलों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये की ‘राजीव गांधी वन संवर्धन योजना’ लागू की जाएगी। प्रत्येक समूह को पांच वर्षों में 6 लाख 40 हजार रुपये दिए जाएंगे।
हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए दृढ़संकल्प हैै। सभी पात्र महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से प्रतिमाह 1500 रुपये प्रदान करने के लिए ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि’ योजना आरंभ की गई है ताकि अपनी दैनिक ज़रूरतों के लिए उन्हें किसी पर निर्भर ना रहना पड़े। एक जनवरी, 2025 से 31 मार्च, 2026 के बीच 21 वर्ष की आयु पूरा करने वाली बेटियों तथा दूसरों के घरों में काम कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाली महिलाओं को भी इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा।
‘महर्षि वाल्मीकि कामगार आवास योजना’ के अंतर्गत 2 लाख 50 हजार रुपये से कम सालाना आय वाले वाल्मीकि समुदाय के सफाई कर्मचारियों को घर बनाने के लिए तीन लाख रुपये देने का प्रावधान है।
समाज के संवेदनशील वर्गों के अधिक से अधिक लोगांे को लाभान्वित करने के लिए बीपीएल परिवारों की सूची में संशोधन किया जा रहा है। हमारी सरकार ने मनरेगा दिहाड़ी में 80 रुपये की ऐतिहासिक वृद्धि कर इसे 240 से बढ़ाकर 320 रुपये किया है। दिहाड़ीदारों को 25 रुपये बढ़ोतरी के साथ 425 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी देने का निर्णय लिया गया है।
अनाथ बच्चों, बेसहारा महिलाओं और वृद्धजनों को सहारा देने के लिए हमने ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ शुरू की है। इसके तहत 6000 बच्चों को ‘चिल्ड्रन आफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया गया है। अनाथ बच्चों को सहारा देने के लिए कानून बनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना है। हाल ही में कई जिलों से ‘चिल्ड्रन आफ द स्टेट’ को दिल्ली, चंडीगढ़, गोवा और अटारी-बाघा बॉर्डर आदि स्थानों के भ्रमण पर भेजा गया।
हिमाचल में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही धार्मिक और साहसिक पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं। हमारी सरकार इन सम्भावनाओं का पर्याप्त दोहन करते हुए हिमाचल को विश्व के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते सितारे के रूप में स्थापित करने को पूर्णतः समर्पित है। कांगड़ा ज़िले को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। गगल हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश भर में लगभग 2400 करोड़ रुपये से नए पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे।
‘मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्ट-अप योजना’ के तहत जनजातीय क्षेत्रों मंे हिमाचली युवाआंे को होम-स्टे और होटल बनाने के लिए ऋण पर 5 प्रतिशत और गैर-जनजातीय क्षेत्रों में 4 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा।
औद्योगिक विकास को बढ़ाने के लिए हमारी सरकार ने पिछले साल 149 औद्योगिक प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की जिनमें 3084 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 15 हज़ार लोगों को रोज़गार के अवसर प्राप्त होंगे। हमने युवाओं के लिए 680 करोड़ रुपये की ‘राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना’ शुरू कर अपनी चुनावी गारंटी को पूरा किया है। प्रदेश के शहरी क्षेत्र के फल-सब्जी विक्रेताओं, चाय विक्रेताओं और अन्य के लिए मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना शुरू की जाएगी।
हमारी सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता लाते हुए यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को बेहतरीन उपचार के लिए बाहरी राज्यों का रुख न करना पड़े। इस वर्ष 1730 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों, 69 सिविल अस्पतालों, क्षेत्रीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में अत्याधुनिक स्वास्थ्य उपकरण लगाए जाएंगे। हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से कैंसर का उत्कृष्ट केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस वर्ष 69 संस्थानों में डायलिसिस सेवाओं की सुविधा और 11 स्वास्थ्य संस्थानों में ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना की जाएगी।
एआईएमएसएस चमियाणा, शिमला, और टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में रोबोटिक सर्जरी की स्थापना भी की जाएगी। आईजीएमसी शिमला, एआईएमएसएस चमियाणा तथा हमीरपुर व नेरचौक चिकित्सा महाविद्यालयों में अत्याधुनिक एमआरआई मशीनें और आईजीएमसी शिमला में पैट-स्कैन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। आईजीएमसी शिमला में नए कैंसर अस्पताल भवन और ट्रामा सेंटर की सुविधा प्रदान की गई है।
‘रोगी मित्र योजना’ के अन्तर्गत विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 1000 रोगी मित्रांे की नियुक्ति की जाएगी। 70 वर्ष या इससे अधिक आयु के मेरे बड़े भाइयों व बहनों को ‘मुख्यमंत्री वृद्धजन देखभाल योजना’ के अन्तर्गत मोबाइल स्वास्थ्य वैन के माध्यम से घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा प्रदान की जाएगी।
‘आचार्य चरक योजना’ से सभी सरकारी आयुष अस्पतालों और औषधालयों में निःशुल्क जांच और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएंगी। सभी विधानसभा क्षेत्रों में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान खोले जा रहे हैं और प्रत्येक मे छह-छह विशेषज्ञ चिकित्सक होंगे। कैंसर मरीजों को इलाज सहित 42 प्रकार की दवाइयां मुफ्त प्रदान की जा रही है।
पिछली भाजपा सरकार का कार्यकाल जब पूरा हुआ, उस समय शिक्षा क्षेत्र में हमारी रैंकिंग 21वें स्थान पर पहंुच गई थी। हमारे लिए यह बहुत बड़ी चुनौती थी। इस क्षेत्र में सुधार के लिए हमने प्रभावशाली कदम उठाए जिसके कारण प्रदेश की रैंकिंग में जबरदस्त उछाल आया है।
एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और स्कूलों में पेयजल उपलब्धता के मामले में हिमाचल को अव्वल आंका गया है। हमने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करने और उन्हें शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने के लिए सभी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेज़ी मीडियम में पढ़ाई आरम्भ की है।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक से लैस राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जाएंगे। इस वर्ष 31 डे-बोर्डिंग स्कूलों के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। हमने पहली से बारहवीं तक एक ही शिक्षा निदेशालय का गठन किया है। निदेशालय उच्च शिक्षा, महाविद्यालयों सहित उच्च शिक्षा के सभी पहलुओं की देखरेख करेगा।
‘मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना’ के तहत विधवा, बेसहारा, तलाकशुदा महिलाओं और विकलांग माता-पिता के बच्चों की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी खर्चों के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जा रहे हैं। स्नातक, स्नातकोत्तर डिप्लोमा या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने वालों की ट्यूशन फीस और हॉस्टल का खर्च वहन करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।
नई पहल के तहत शैक्षणिक गतिविधियों का ज्ञान अर्जित करने के लिए पहले चरण में 270 शिक्षक सिंगापुर भ्रमण पर भेजे गए हैं। इसके अलावा, 200 शिक्षक प्रदेश के अन्य राज्यों में शैक्षणिक अनुभव हासिल कर लौटे हैं। 50 मेधावी विद्यार्थियों को 11 दिनों के शैक्षणिक अध्ययन के लिए कम्बोडिया और सिंगापुर भेजा गया, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।
हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के सेवन और तस्करी को रोकने के लिए हमने कड़े कदम उठाए हैं। सत्ता में आते ही हमने पीआइटी-एनडीपीएस अधिनियम को लागू किया जो पिछली भाजपा सरकार पांच साल तक नहीं कर पाई। इसके लागू होने के बाद ऐसे लोगों की गिरफ्तारी हुई जो बार-बार नशे के कारोबार में शामिल थे। उनकी संपत्ति की जांच कर उसे अटैच किया जा रहा है।
पंचायत स्तर पर नशीले पदार्थों को बेचने वालों और नशे के आदी लोगों की मैपिंग की जा रही है। नशे के चुंगल में फंसे लोगों और इसमें संलिप्त अपराधियों में अंतर करने के लिए नशा निवारण अधिनियम पारित किया गया है।
सिरमौर के कोटला बड़ोग में एक अत्याधुनिक पुनर्वास केंद्र बनाया जा रहा है। अन्य जिलों में भी इस प्रकार के सेंटर स्थापित किए जाएंगे, ताकि नशे के दलदल में फंसे व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जा रही है। हमने संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम भी पारित किया है।
जल आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए 200 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री स्वच्छ जल शोधन योजना लाई जा रही है। ग्रामीण पेयजल उन्नयन परियोजना के तहत 745 करोड़ रुपये से 8 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में 20,663 घरों तक बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को बेहतर परिवहन सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इस वर्ष परिवहन निगम में 500 ई-बसों की खरीद की जाएगी। शिमला शहर में 1734.40 करोड़ रुपये की लागत से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रोपवे का निर्माण किया जाएगा। देश की आजादी के बाद पहली बार बड़ा भंगाल जैसे अति दुर्गम क्षेत्र को सड़क सुविधा से जोड़ने और शिमला जिले के दुर्गम डोडरा-क्वार तक पक्की सड़क पहुंचाने की पहल की है।
हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य चयन आयोग की स्थापना की है।
इतिहास में पहली बार तहसील और उप-तहसील स्तर पर विशेष राजस्व अदालत का आयोजन किया। अब तक 2 लाख 75 हजार से अधिक इंतकाल, 16,258 तकसीम, 27,404 निशानदेही और 7260 दुरुस्ती के मामलों का निपटारा किया है।
प्रदेश के दूर-दराज इलाकों में बसे लोगों को काम के लिए जिला मुख्यालय या राज्य सचिवालय न आना पड़े, इसके लिए ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। मैं स्वयं डोडरा-क्वार और कुपवी गया और एक रात वहां रुका। मेरे मंत्रिमंडल के सहयोगी भी इस कार्यक्रम के माध्यम से जन समस्याओं का निवारण कर रहे हैं।
हमने अपने दो साल के कार्यकाल मंे 42,000 से अधिक रोज़गार के अवसर उपलब्ध करवाए हैं। इस वर्ष विभिन्न विभागों में 25,000 भर्तियां की जाएंगी।
प्रदेश के विकास में कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है। हमने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। प्रदेश के एक लाख 36 हजार एनपीएस कर्मचारियों को इस फैसले का लाभ मिला है। 15 मई से 70 वर्ष से 75 वर्ष के आयु वर्ग के पेंशनरों के बकाया एरियर का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों व अधिकारियों को उनके बकाया वेतन एरियर का चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जाएगा। एक जून से प्रदेश के कर्मचारियों को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते की अतिरिक्त किस्त जारी की जाएगी। राज्य सरकार ने दो वर्षों में 14 प्रतिशत मंहगाई भत्ता जारी किया है। विभिन्न विभागों में कार्यरत पैरा वर्कर के मानदेय में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप सभी के सहयोग से प्रदेश सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर और देश के सबसे समृद्धशाली राज्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
हिमाचल दिवस के अवसर पर मैं पुनः आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

जय हिन्द, जय हिमाचल...!

भारतीय चिन्तन, भारतीय विचार, भारतीय सोच, भारतीय दृष्टिकोण को लेकर चलनी चाहिए सरकारें की पैरवी करने वाले पहले शख्स थे अटल जी

भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 100वीं जन्म जंयती 25 दिसम्बर 2024 को प्रारम्भ होने जा रही है। यह एक ऐसा अवसर है जब हम देश के उस महान नेता को स्मरण करेंगे, जिसने आजाद भारत के अन्दर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। भारत आजादी के बाद केवल और केवल कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में था, क्योंकि 1947 से पहले आजादी का नेतृत्व श्रद्धेय मोहन दास कर्मचन्द गांधी के हाथ में था और कांग्रेस पार्टी अर्थात राजनीति दल न होकर आजादी का आन्दोलन था, परन्तु 1947 के बाद कांग्रेस का नेतृत्व स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू के हाथ में आया, उन्होनें आजादी की उस लड़ाई को अपने राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करते हुए कांग्रेस पार्टी की सरकारों को निरन्तर बनाने में उसका उपयोग किया। अटल बिहारी जी पहले वो शख्स बने जिन्होंने भारतीय चिन्तन, भारतीय विचार, भारतीय सोच, भारतीय दृष्टिकोण को लेकर सरकारें चलनी चाहिए इस बात की पैरवी की। डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और पं० दीनदयाल उपाध्याय जी के द्वारा खड़े किये गये भारतीय जनसंघ का नेतृत्व 1950 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी जी के हाथ में आया और 1957 में पहली बार लोक सभा में सांसद के रूप में पहुँचे और उनकी जो आभा थी, उनकी जो वाककला थी, उनकी जो भाषणकला थी, उनका जो कवि हृदय था, उसने पूरे देश को बरबस अपनी ओर आकर्षित किया। जब तक अटल जी जीवित रहे सक्रिय राजनीति में रहे, चाहे किसी भी पार्टी से सम्बन्ध रखने वाला व्यक्ति हो, वा सामान्य समाज के व्यक्ति हो, वो अटल जी को सुनने के लिए ललायित रहता था। जगह-जगह उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भाग लेते थे जो भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के साथ अपना नाता नहीं रखते थे, अपितु विरोध भी रहते थे, वे भी अटल जी को सुनते थे। उनकी गुणवता के कारण ही विपक्ष का नेता रहते हुए उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व यू०एन०ओ० के अन्दर किया। भारतीय भाषा अर्थात हिन्दी के प्रति उनका जो स्नेह, लगाव और भारत का विकास भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही होगा यह दृढ निश्चिय उनके मन में था। जिसके कारण जब वह यू०एन०ओ० में गए, तो पहली बार भारत के किसी राजनेता ने, किसी अधिकारी ने विश्व पटल पर हिन्दी का उपयोग करते हुए अपनी बात को रखा। 1975 में जब श्रीमती इन्दिरा गांधी ने देश में आपात काल लगा दिया और हजारों लाखों लोगों को काल कोठरी के पीछे डाल दिया, उस समय में अटल जी, आडवाणी जी और भारतीय जनसंघ के सभी वरिष्ठ नेताओं को जेल में डाला गया। अटल जी ने उस समय देश का जेल में रहते हुए नेतृत्व किया और लोकतन्त्र जीवित रहना चाहिए इसके लिए अपना, अपनी पार्टी, अपना दल इसका विलय जनता पार्टी में स्वीकार किया, अनेक पार्टियों को मिलाकर जनता पार्टी बनी, 1977 में जो चुनाव हुआ उसमें पहली बार देश में गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। मुरारजी भाई देसाई उसके प्रथम प्रधानमंत्री बने और विदेश मंत्री के रूप में श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश का नेतृत्व किया। ढ़ाई साल के अन्दर वैचारिक मतभेद होने पर वह पार्टी टूट गई और भारतीय जनसंघ, भारतीय जनता पार्टी में परिवर्तित हुआ। इस प्रकार 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी जी उसके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
उनके नेतृत्व में और अटल अडवाणी की जोड़ी ने इस पार्टी को तेज गति से बढ़ाना शुरू किया। कांग्रेस पार्टी के तत्कालिक नेता भारतीय जनता पार्टी के ऊपर हँसा करते थे, खिल्ली उड़ाया करते थे कि दो सांसदों वाली राष्ट्रीय पार्टी भारतीय जनता पार्टी है, परन्तु अटल जी, आडवाणी जी की जोड़ी ने इसको 1996 तक लगभग 200 सीटों तक पहुँचाकर, पहली बार प्रधानमंत्री की कुर्सी को माननीय अटल जी ने शोभायमान किया और किस प्रकार का व्यक्तित्व है, किस प्रकार का चरित्र वो रहा, यह अनुमान सहज में लगाया जा सकता है। जब एक वोट की कमी से Floor Of The House पर अटल जी की सरकार गिर जाती है। तो वह और तोड़फोड़ नहीं करते, वो कोई व्यापार नहीं करते वो Horse Trading नहीं करते और वस्तुस्थिति पूरे देश के सामने रखते हुए अपना त्यागपत्र दे देते हैं। पुनः 1997-98 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद भारत को आणविक शक्ति बनाने का काम यदि किसी व्यक्ति ने किया तो उसका नाम अटल विहारी वाजपेयी है। 11 मई 1998 में पोखरण में एक के बाद एक तीन विस्फोट करने के बाद भारत का आणविक परीक्षण पूरा हुआ। दुनिया ने भारत के ऊपर प्रतिबन्ध लगाए भारत के ऊपर दबाव डाला गया कि भारत आणविक शक्ति नहीं बनेगा। अटल जी ने पूरी हिम्मत के साथ दुनियां के इन प्रतिबन्धों का मुकाबला किया और कहा भारत शक्तिशाली बनेगा और बनकर रहेगा। भारत आणविक शक्ति बना तो उसके पीछे श्रद्धेय अटल विहारी वाजपेयी जी है। वाजपेयी जी गांव के विकास के प्रति पूरी तरह सजग व चिन्तित थे। केन्द्र से मिलने वाली धनराशि राज्यों को और ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए जाया करती थी, परन्तु राज्यों की आर्थिक स्थितियां अच्छी न होने के कारण राज्य उन सड़कों के पैसों को सड़कों पर न लगाकर अन्य मदों में प्रयोग किया करते थे। अटल जी ने इस बात को गम्भीरता से लेते हुए "प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना" को जन्म दिया। यह योजना अर्थात एक सड़क बनेगी जो गांव को पूरी तरह से छुएगी और पक्की सड़क होगी, जिसका शतप्रतिशत व्यय केन्द्र की सरकार देगी और मैन्टिनेंस भी केन्द्र की सरकार करेगी। मुझे अच्छे से याद है पहले ही चरण में 64 हजार करोड़ रू0 सन 2000 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए रखा गया। यह इतनी बड़ी राशि थी कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पर्क मार्गों का एक जाल बिछना शुरू हो गया और आज यदि हम देखें तो कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जो इन सम्पर्क मार्गों का लाभ नहीं उठा रहा और यह ग्राम सड़क योजना सबसे अधिक पापुलर योजना बनी। इसी प्रकार अटल जी की सरकार में खाद्यान का उत्पादन बहुत बढ़ा और खाद्यान को गरीब तक पहुँचाने का काम शुरू हुआ। 2001 में अन्त्योदय अन्न योजना का प्रारम्भ अटल जी की सरकार में आदरणीय शान्ता कुमार जी द्वारा किया गया। ये अन्न योजना गरीबों के लिए कल्याणकारी योजना के रूप में खड़ी हुई। हम ऐसी अनेक अनेक योजनाओं का वर्णन कर सकते हैं, जो अटल जी ने मेरे देश के भाग्य को बदलने के लिए दी और इसका परिणाम हुआ कि देश निरन्तर गति से आगे बढ़ा। अटल जी स्वदेशी के प्रति पूरी तरह सजग थे, अटल जी भारतीय भाषाओं संस्कृत, भारतीय संस्कृति और भारत की जो सांस्कृतिक विरासत है उसको लेकर सदैव उसके प्रति सजग थे, यह एक ऐसा व्यक्तित्व आजादी के बाद के समय में भारत की राजनीति का जो विशिष्ट लेकर खड़ा हुआ वो अटल विहारी वाजपेयी जी थे हम उनके श्री चरणों में नमन करते हैं और उनको श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। कारगिल का युद्ध देश के लिए एक मिसाल बना, जब अटल जी स्वयं बॉडर पर पहुँचे और भारत के सैनिकों का मनोबल बढ़ाया । अमेरिका को दो टूक कहा कि जब तक एक भी पाकिस्तानी भारत की सीमा में है युद्ध बन्दी नहीं होगी और न ही कोई वार्ता।
सैनिकों को मिलने वाले सम्मान का स्वरूप बदला गया। सीमा पर अपना बलिदान देने वाले वीर जवानों की शहादत को सलाम किया जाने लगा।
ऐसे थे अटल जी जिन्होंने अपने कवि हृदय से कहा अटल चुनौती अखिल विश्व को भला बुरा चाहे जो माने, डटे हुए है राष्ट्र धर्म पर विपदाओं में सीना ताने।
 
डॉ राजीव बिंदल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष 
हिमाचल
 
 
 
 

किन महिलाओं को मिलेगी 1500 रूपये की सम्मान राशि फॉर्म से उठे सवाल

शिमला/शैल। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने प्रदेश की हर महिला को 1500 रूपये प्रतिमाह एक सम्मान राशि देने की गारंटी दी थी। इस गारंटी का असर हुआ और कांग्रेस की सरकार बन गयी। लेकिन सरकार बनने के बाद इस गारंटी को पूरा करना कठिन हो गया। क्योंकि प्रदेश की स्थिति तो श्रीलंका जैसे हालात होने की कगार पर थी। परन्तु यह गारंटी एक बड़ा मुद्दा बनाकर विपक्ष ने उछाल दी। जनता भी इसके प्रति सचेत हो गई और कांग्रेस सरकार से इसकी मांग करने लगी। कांग्रेस के नेता जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं रहे। मुद्दा कांग्रेस हाईकमान तक जा पहुंचा। हाईकमान ने लोकसभा चुनावों से पहले इसे लागू करने के निर्देश दे दिए।
अब सुक्खू सरकार ने इस गारंटी पर अमल करने की घोषणा कर दी है। इसके लिये एक फॉर्म जारी किया गया है। जो यह राशि पाने के लिये हर महिला को भरकर देना है। इस फॉर्म में कुछ वर्ग चिन्हित किये गये हैं। इस लाभ के लिये आवेदन करने वाली महिलाओं से यह जानकारी मांगी गयी है कि उनके परिवार का कोई सदस्य इन वर्गों में से तो नहीं है। फार्म में यह स्पष्ट नहीं किया गया है की इन वर्गों से संबंधित महिला इस लाभ की पात्र होंगी या नहीं। परन्तु यह जानकारी मांगने से ही यह शंका हो जाती है कि इनसे जुड़ी महिलाएं इस लाभ की पात्रा नहीं होगी। यदि ऐसा हुआ तो इस राशि के लाभार्थीयों का आकड़ा बहुत ही कम रह जायेगा। इस फार्म से तो यही संकेत उभरता है।
यह है फॉर्म
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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