शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने वर्ष 2025 में कुल 35 दिन बैठक की। यह संख्या विधानसभा नियमों में तय न्यूनतम बैठक दिनों के बराबर है। यह जानकारी पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल विधानसभा ने इस दौरान 21 विधेयक ;बिलद्ध पारित किए, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा बिल एक ही दिन में मंजूर हो गये और बजट का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिना चर्चा के पारित कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में देश की सभी राज्य विधानसभाओं का औसत बैठक समय 24 दिन रहा, जबकि हिमाचल विधानसभा 35 दिन चली। ओडिशा विधानसभा सबसे ज्यादा 43 दिन और नागालैंड विधानसभा सबसे कम सात दिन चली। हिमाचल विधानसभा की एक बैठक औसतन पांच घंटे तक चली।
हिमाचल विधानसभा ने वर्ष 2025 में 21 बिल पास किये। इनमें से करीब 57 प्रतिशत बिल ऐसे थे जिन्हें सदन में पेश करने के एक दिन के भीतर ही मंजूरी मिल गई। केवल चार प्रतिशत बिलों को ही विस्तार से जांच और चर्चा के लिए विधानसभा समितियों के पास भेजा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि समितियों में बिलों की गहराई से समीक्षा होती है, इसलिए अधिक बिलों को समिति के पास भेजना कानूनों को बेहतर बनाने में मदद करता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हिमाचल प्रदेश और झारखंड में करीब आधे बिलों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने में तीन महीने से अधिक समय लगा। यानी विधानसभा से पास होने के बाद भी कई कानूनों को लागू होने में काफी समय लगा।
वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश ने कई महत्वपूर्ण कानून बनाये। इनमें संगठित अपराध पर नियंत्राण के लिए नया कानून शामिल है। इस कानून में गंभीर अपराधों के लिए कड़ी सजा, यहां तक कि आजीवन कारावास का भी प्रावधान किया गया है। राज्य ने सार्वजनिक संपत्तियों और सुविधाओं जैसे सड़क, रास्ते और नहरों को नुकसान पहुंचाने या उनमें अवैध बदलाव रोकने के लिए भी कानून बनाया।
इसके अलावा पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायतों के अधिकार बढ़ाए गए और ग्राम सभा से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए। सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए भी नया कानून बनाया गया। राज्य सरकार ने नशे की समस्या से निपटने और नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास के लिए भी कानून पारित किया।
महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर देने के लिए हिमाचल प्रदेश ने दुकानदार एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कानून में संशोधन किया। इसके तहत महिलाओं को रात्रिकालीन शिफ्रट में काम करने की अनुमति दी गई और ओवरटाइम की सीमा भी बढ़ाई गई। ऐसे बदलाव करने वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश भी शामिल रहा।
बजट पर चर्चा के मामले में रिपोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। राज्यों ने औसतन अपने बजट पर आठ दिन चर्चा की, जबकि हिमाचल प्रदेश में बजट पर सात दिन चर्चा हुई। हालांकि इसके बावजूद राज्य का 70 प्रतिशत से अधिक बजट बिना किसी चर्चा के पारित हो गया। इस मामले में हिमाचल प्रदेश, असम और झारखंड उन राज्यों में शामिल रहे जहां बजट का बड़ा हिस्सा बिना बहस के मंजूर किया गया। वहीं तमिलनाडु ऐसा राज्य रहा जहां पूरे बजट पर चर्चा की गई।
पीआरएस की रिपोर्ट से साफ है कि हिमाचल विधानसभा ने तय बैठक दिवस पूरे किए और कई महत्वपूर्ण कानून बनाए। लेकिन बड़ी संख्या में बिलों का जल्दी पास होना और बजट के बड़े हिस्से का बिना चर्चा पारित होना इस बात की ओर भी संकेत करता है कि विधानसभा में महत्वपूर्ण मुद्दों पर और अधिक विस्तृत चर्चा की गुंजाइश बनी हुई है।
शिमला/शैल। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर स्थानीय निकाय चुनावों के बाद जनादेश और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अपमान का आरोप लगाया है। शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है और भाजपा को समर्थन मिला है, लेकिन मुख्यमंत्री इस जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हार की बौखलाहट में सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जो लोकतांत्रिक परंपराओं और जनमत के सम्मान के खिलाफ हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा जिला परिषद और ब्लॉक समिति सदस्यों को लेकर दिया गया बयान जनादेश का अपमान था। इसके बाद जिला परिषद सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में परिजनों और मीडिया को प्रवेश नहीं देने का निर्णय भी इसी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण किसी भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है और परंपरागत रूप से उनके परिवार के सदस्य भी इस समारोह का हिस्सा बनते रहे हैं। यह जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों के लिए सम्मान और गौरव का क्षण होता है, लेकिन सरकार ने इस परंपरा को तोड़कर निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपमान किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार स्थानीय निकायों और पंचायत संस्थाओं में भाजपा समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार का उद्देश्य जिला परिषद, ब्लॉक समिति तथा स्थानीय निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनावों में राजनीतिक लाभ हासिल करना है। इसके लिए भाजपा समर्थित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश के मुखिया के रूप में जनमत का सम्मान करना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय सरकार जनादेश को अपने पक्ष में मोड़ने के प्रयासों में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों को प्रताड़ित करने के लिए अधिकारियों को लगाया गया है और विभिन्न माध्यमों से उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस उद्देश्य से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया है, सरकार उसे कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने स्थानीय निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव की समयावधि बढ़ाने के निर्णय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले नगर पंचायत और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सभासदों के निर्वाचन के सात दिनों के भीतर कराने का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए इस अवधि को बढ़ा दिया है। उनके अनुसार यह निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी हार को छिपाने और सत्ता का प्रभाव बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि स्थानीय निकायों में जनता ने जिस प्रकार भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को समर्थन दिया है, उससे कांग्रेस सरकार असहज है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जनादेश को स्वीकार करने के बजाये निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाकर सत्ता समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्रा और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा जनादेश की ‘चोरी’ नहीं होने देगी और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक दुरुपयोग का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का निर्णय सर्वाेपरि होता है और सरकार को उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर जनादेश का सम्मान करें और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करें।
उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों और पंचायत संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
The Joomla! content management system lets you create webpages of various types using extensions. There are 5 basic types of extensions: components, modules, templates, languages, and plugins. Your website includes the extensions you need to create a basic website in English, but thousands of additional extensions of all types are available. The Joomla! Extensions Directory is the largest directory of Joomla! extensions.
We search the whole countryside for the best fruit growers.
You can let each supplier have a page that he or she can edit. To see this in action you will need to create a users who is in the suppliers group.
Create one page in the growers category for that user and make that supplier the author of the page. That user will be able to edit his or her page.
This illustrates the use of the Edit Own permission.