Thursday, 04 June 2026
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स्वास्थ्य विभाग की खरीद पर उठते सवालों का स्पष्टीकरण केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग से क्यों

शिमला/शैल। पूर्व स्वास्थ्य मन्त्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर कौल सिंह ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कोरोना काल के दौरान की गयी खरीददारीयों में बड़ा घोटाला होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं जीएस बाली, चन्द्र कुमार और विपल्व ठाकुर के साथ एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए यह आरोप लगाया कि विभाग ने 514 रूपये का आक्सीजन मीटर 29506 रूपये का मास्क 16 और 9000 का आक्सीजन गैस सिलैण्डर 15700 रूपये में खरीद कर घोटाला किया गया है। आरोप लगाया गया 15 आईटमों की खरीद में ही 24,49000 रूपये का घपला किया गया है। विभाग में हुई कुल खरीददारीयों में उसे 4 करोड़ का घपला होने का आरोप है। आक्सीजन गैस पाईप लाईन सिलैण्डर सप्लाई करने और उन्हें लगाने की पूरी प्रक्रिया का काम केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है। मैडिकल से संबंधित इन आईटमों के मानदण्ड और मानक क्या थे और सप्लाई किये गये उपकरण इन मानको पर पूरे उतरते हैं या नहीं इसको लेकर कोई खुलासा पत्राकार वार्ता में नही किया गया है। यह खरीद कोरोना काल में की गयी जब पूरे देश में लाॅकडाऊन चल रहा था और यातायात के सारे साधन बन्द थे। हालात की इसी गंभीरता को ध्यान मे रखते हुए दवाईयोें और उपकरणों की खरीद के लिये प्रदेश के वित्त विभाग ने खरीद नियमों में भी आवश्यक बदलाव कर दिये थे। नियमों के बदलाव के परिदृश्य में स्वास्थ्य विभाग की खरीद सवालों के घेरे से बाहर हो जाती है। लेकिन विधान सभा के मानसून सत्र में जब विधायक लखविन्दर राणा, राम लाल ठाकुर और रमेश धवाला ने यह सवाल पूछा कि गत तीन वर्षों में 31-1-2020 तक किस किस फर्म से कितनी कितनी धनराशी की दवाईयां और उपकरण खरीदे गये और सरकार द्वारा रोगियों को जो मुफ्त दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं उनके सैंपल फेल हुए हैं। यह जानकारी सदन में रखने की बजाये जबाव दिया गया कि सूचना एकत्रित की जा रही है। यह सवाल कोविड से पहले की खरीद पर था और विभाग पर बहुत पहले ही इस संबंध में सवाल उठने शुरू हो गये थे। ऐसे में जब जबाव में यह कहा जायेगा कि सूचना एकत्रित की जा रही है तो निश्चित रूप से इस सन्देह को बल मिलेगा कि कुछ छुपाया जा रहा है। अब जब कांग्रेस नेताओं ने विभाग की खरीद पर सवाल उठाये हैं तो उस पर केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियन्ता विद्युत केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग लौंग बुड शिमला की ओर से जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि इन मानको के उपकरण मांगे गये थे और बोली दाता को किन मानदण्डांे पर पूरा उतरना था। यह स्पष्ट किया गया है कि इस खरीद के लिये पहले 16-5-2020 को ई-निविदायें आमन्त्रित की गयी लेकिन कोई आवेदन नही आया। इस कारण 23-5-2020 को फिर ई निविदायें आमन्त्रित की गयीं और चार निविदायें आयी। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए न्यूनतम बोली दाता को खरीद का आर्डर दिया गया। पूरी प्रक्रिया एकदम पारदर्शी और न्यूनतम बोलीदाता सारे मानकों को पूरा करता है इसलिये खरीद पर सवाल उठाना तथ्यहीन और गलत है।
यह स्पष्टीकरण केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियन्ता (विद्युत) द्वारा जारी किया गया है। इससे यह आभास होता है कि यह निविदायें प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने नहीं बल्कि केन्द्रिय लोक निर्माण ने आमन्त्रित की थी। यहां यह सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिये खरीद ऐजैन्सी केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग को बना रखा था? यदि ऐसा था तो यह कब किया गया? जो स्पष्टीकरण आया है उसके मुताबिक चार बोलीदाता थे लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग भी एक बोलीदाता था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह केन्द्रिय लोकनिर्माण विभाग यह उपकरण स्वयं बनाता है? क्या वह ऐसे उपकरणों की गुणवता जांचने के विशेषज्ञ हैं। केन्द्रिय लोक निर्माण विभाग ने किस अधिकार से यह स्पष्टीकरण जारी किया है यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। बल्कि इससे अनचाहे ही यह मामला और उलझ जाता है। क्योंकि खरीद पर आरोप तो कीमतों को लेकर लगाये गये हैं और स्पष्टीकरण प्रक्रिया को लेकर दिया गया है।

कंगना रणौत पर हिमाचल भाजपा अब चुप क्यों

शिमला/शैल। हिमाचल की बेटी पदमश्री अभिनेत्राी कंगना रणौत और उनकी बहन रंगोली चन्देल के खिलाफ मुंबई में बान्द्रा पुलिस ने आईपीसी की धाराओं 158 A, 295 A और 124 A के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। यह मामला अदालत के सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत आये निर्देशों पर दर्ज किया गया है। इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय में आयी एक याचिका पर कंगना रणौत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कर्नाटक में दर्ज किया गया मामला कंगना की उन प्रतिक्रियाओं पर किया गया जो उन्होंने कृषि उपज विधेयकों पर उभरे किसान आन्दोलन को लेकर सोशल मीडिया के मंचो पर अपनी पोस्ट और ट्वीटस के माध्यम से व्यक्त की थीं। मुबई में फिल्म उद्योग के एक कास्ंिटग निदेशक मुनब्बर अलि सैयद की शिकायत पर अदालत में मामला दर्ज करने के निर्देश दिये हैं। दानों ही मामले गंभीर हैं और इनके परिणाम भी गंभीर होंगे। माना जा रहा है कि इन मामलों में कंगना के पास सार्वजनिक क्षमा याचना मांगने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नही रहेगा। उसकी यह प्रतिक्रियाएं राजनीतिक बड़बोलेपन का परिणाम मानी जा रही हैं। कंगना सार्वजनिक तौर पर चर्चा में तब आयी जब सुशान्त सिंह राजपूत प्रकरण पर उन्होंने अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी को एक इन्ट्रव्यूह देकर यह कहा कि सुशान्त ने आत्महत्या नही की है बल्कि यह हत्या का मामला है। इसमें ड्रग माफिया की भी भूमिका है और इस सबके उनके पास पक्के सबूत मौजूद हैं। कंगना ने यहां तक दावा किया था कि यदि वह अपने आरोपों को प्रमाणित नही कर पायेंगी तो पदमश्री वापिस कर देंगी। इसी बीच मुुंबई में उनके कार्यालय में हुए अवैध निर्माण के खिलाफ कारवाई हो गयी। इस कारवाई को लेकर कंगना ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जुबानी जंग छेड़ दी थी। इस जंग के परिणाम स्वरूप हिमाचल सरकार ने उसे सुरक्षा दे दी। हिमाचल सरकार की सिफारिश पर केन्द्र ने उसे वाई प्लस सुरक्षा प्रदान कर दी। एकदम इतनी सुरक्षा और चर्चा पा लेने के परिणाम स्वरूप यह क्यास लगाये जाने शुरू हो गये कि राष्ट्रपति उसे सांसद मनोनीत करने वाले हैं और बिहार विधान सभा चुनावों में कंगना भाजपा की स्टार प्रचार हो जायेंगी। हिमाचल में भी उसे भविष्य में बड़ी भूमिका में देखा जाने लगा। प्रदेश भाजपा ने उसके अवैध निर्माण को गिराये जाने के खिलाफ शिमला की रिज से उसके पक्ष में प्रदेशभर में हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया। मोदी -भाजपा के भक्तों ने तो मीडिया और उसके बाहर बदले में प्रियंका गांधी के आवास को गिराये जाने की मांग तक छेड़ दी।
लेकिन जैसे ही सुशान्त सिंह राजपूत मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गयी और उसके बाद एम्ज़ की विशेषज्ञ कमेटी ने पूरी स्पष्टता के साथ सुशान्त की मौत को हत्या की बजाये आत्महत्या ही करार दिया तो सारा परिदृश्य ही बदल गया। अब तो सीबीआई ने भी सुशान्त सिंह मामले को आत्महत्या ही कहा है। जब सारी बहस का मुद्दा ही बदल गया तो एनवीएसए ने कुछ मीडिया चैनलों के खिलाफ अपनी गाज गिराते हुए उन्हें जुर्माना लगाया और फतवा दिया कि सुशान्त मामले में बहुत कुछ झूठ परोसा जा रहा था। इस कारवाई से पूरे प्रकरण का परिदृश्य ही बदल गया है। प्रदेश भाजपा के लिये कंगना रणौत अब कोई मुद्दा नही रह गया है और कंगना ने स्वयं भी इस संबंध में मौन धारण कर लिया है। अब जब अदालत के निर्देशों पर कंगना के खिलाफ मामले दर्ज हो गये हैं और भाजपा इस पर कोई चर्चा नहीं कर पा रही है तो राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में दबी जुबान से यह कहा जाने लगा है कि कंगना के कन्धों पर महाराष्ट्र और बिहार में कोई बड़ी गेम खेलने की विसात बिछा रही थी जो एम्ज की रिपोर्ट आने से आगे नहीं बढ़ पायी।

अटल टनल से सोनिया गांधी की शिलान्यास पट्टिका गायब होने पर भड़की कांग्रेस पुलिस में दी शिकायत

शिमला/शैल। जिस अटल टनल का उद्घाटन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने तीन अक्तूबर को किया है इसका शिलान्यास 28 जून 2010 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद की मेयर पर्सन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया था। उस समय प्रदेश में मुख्यमन्त्री प्रेम कुमार धूमल थे और वीरभद्र केन्द्र में ईस्पात मन्त्री थे। इस शिलान्यास में यह सभी लोग शामिल थे और इसकी पट्टिका वहां पर लगाई गयी थी लेकिन अब जब इस अटल टनल का प्रधानमन्त्री ने उद्घाटन किया तब यह शिलान्यास पट्टिका वहां से गायब हो गयी। इस पर जब कांग्रेस ने सवाल उठाया तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संसद सुरेश कश्यप ने यह जवाब दिया कि कांग्रेस भी अपने शासन में ऐसे पट्टिकाओं को बदलती रही है और इसके कई प्रमाण उनके पास हैं। भाजपा अध्यक्ष के इस जवाब से स्पष्ट हो जाता है कि शिलान्यास पट्टिका को पूरी सोच समझ के साथ ही वहां से हटाया गया है।
स्मरणीय है कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भी उद्घाटन अवसर पर कहा था कि उनसे पहले की सरकारों में ईच्छाशक्ति का अभाव था इसलिये बड़ी योजनाओं पर काम नहीं हो सका। प्रधानमन्त्री के इस कथन से यह गंध आती है कि उनसे पहले देश में किसी ने कुछ किया ही नहीं है। जो कुछ भी विकास हुआ है वह मोदी के आने पर ही हुआ है। स्वभाविक है कि जब शीर्ष पर बैठे हुए व्यक्ति में ऐसी मानसिकता घर कर लेती है तब नीचे का हर व्यक्ति भी उसी मानसिकता से ग्रस्त हो जाता है और आज शायद भाजपा इसी का शिकार हो रही है। जो नेता ऐसी सोच से सहमत नही होते हैं उन्हें ऐसे अवसरों पर आने से ही रोक दिया जाता है। सुरेश कश्यप का जवाब इसी मानसिकता की पुष्टि करता है।
इस शिलान्यास पट्टिका के गायब कर दिये जाने पर कांग्रेस को एक मुद्दा मिल गया है। मनाली ब्लाक कांग्रेस ने वाकायदा इस संबंध में शिकायत दर्ज करवायी है और पुलिस थाना कैलांग ने इस आश्य की एफआईआर दर्ज कर ली है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने इस संबंध में मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर डीजीपी और जिला कुल्लु को पत्र लिखकर पन्द्रह दिनों में इस शिलान्यास पट्टिका को पुनः स्थापित करने और दोषियों के खिलाफ बड़ी कारवाई करने की मांग की है अन्यथा कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेश की जनता के सामने ले जायेगी। इस समय पूरा देश किसान आन्दोलन के कारण उबल रहा है। हिमाचल के किसान बागवान भी इस पर अपना रोष प्रकट कर चुके हैं। ऐसे माहौल में कांग्रेस को सरकार के सारे जन विरोधी फैसलों को जनता में ले जाने का अवसर मिल गया है। राठौर ने इस संद्धर्भ में आरोप लगाया है कि जब कोरोना के कारण आम आदमी की पूरी वित्तिय स्थिति प्रभावित हो गयी है तब ऐसे वक्त में सरकार ने अपनी तिजोरी भरने के लिये बिजली, पानी मंहगा किया फिर बस किराये बढा दिये और अब अस्पतालों में टेस्टों के रेट बढ़ा कर एक और बोझ जनता पर डाल दिया है। पिछले सात महीने से लोगों के काम धन्धे बन्द हैं और सरकार लगातार मंहगाई परोसती जा रही है। राठौर ने इन सारे बढ़े हुए दामों को वापिस लेने की मांग करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि सीमेन्ट कंपनीयों के दवाब में प्रदेश को लूटा जा रहा है। राठौर ने किसानों बागवानों के कृषि क्रेडिट कार्ड पर चक्रवृद्धि ब्याज वसूलने पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे तुरन्त प्रभाव से बन्द करने की मांग की है।
माना जा रहा है कि शिलान्यास पट्टिका गायब किये जाने से कांग्रेस को सरकार के खिलाफ जनता में जाने के लिये एक बहुत ही प्रभावी मुद्दा मिल गया है। सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है क्योंकि इस तरह का आचरण सबके विकास, सबके साथ और सबके विश्वास से एकदम उल्ट है। ऐसे में सारे फैसलों को मिलाकर जनता के लिये एक बड़ा मुद्दा बन जाता है।






























 

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