शिमला/शैल।पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की राजनीति परंपरागत रूप से विकास और सहयोग पर आधारित रही है, लेकिन वर्तमान सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है जिसके दूरगामी परिणाम प्रदेश हित में नहीं होंगे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों, जिन्होंने सरकार का समर्थन नहीं किया, उनके खिलाफ प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और विभागों का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे कदमों का परिणाम अंततः सरकार को भुगतना पड़ता है।
नेता प्रतिपक्ष ने हमीरपुर के विधायक आशीष शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि अवैध खनन से जुड़े मामले में पुलिस स्वयं शिकायतकर्ता बनी, जबकि संबंधित विभाग की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत से वंचित रखने के लिए गंभीर धाराएं जोड़ी गईं और विधायक को बार-बार थाने बुलाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पूर्व कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों, तथा भाजपा नेताओं के परिवारों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि संबंधित विभागों को निष्पक्ष एवं कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। जयराम ठाकुर ने आपदा प्रभावित परिवारों से जुड़े मामलों में भी मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस कारवाई संवेदनशीलता के अनुरूप होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अन्य विधायकों और नेताओं पर भी दबाव बनाया जा रहा है, जिन्होंने सरकार का विरोध किया या उसका साथ छोड़ दिया।
जयराम ठाकुर ने कांगड़ा कार्निवल के आयोजन को लेकर जारी पत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह एक सरकारी अधिसूचित कार्यक्रम है, ऐसे में इसके आयोजन का खर्च आम जनता से वसूला जाना उचित नहीं है। उन्होंने पूछा कि पत्र जिला प्रशासन के बजाये किसी अन्य स्तर से क्यों जारी किया गया और उसमें आधिकारिक बैंक खाता विवरण क्यों नहीं दिया गया।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि दान या सहयोग लिया जा रहा है तो उसकी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और दाताओं को आयकर नियमों के तहत लाभ की जानकारी भी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विभाग को राजनीतिक प्रचार से दूर रहकर तथ्यात्मक और संतुलित सूचना प्रसारित करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को संवैधानिक सीमाओं में रहते हुए कार्य करने की सलाह दी।
जयराम ठाकुर ने आपदा राहत से जुड़े मामलों में भी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान जिन परिवारों ने अपने परिजन खोए, उनके खिलाफ पुलिस कारवाई की खबरें सामने आई हैं, जो संवेदनशीलता के अभाव को दर्शाती हैं।
उन्होंने बंजार और धर्मपुर क्षेत्रों में कथित अवैध कटान और अवैध खनन के मामलों पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कारवाई की मांग की।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रतिशोध आधारित राजनीति प्रदेश की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रशासनिक कारवाई पारदर्शिता, कानून सम्मत प्रक्रिया और तटस्थता के आधार पर की जाये तथा असहमति को अपराध की तरह न लिया जाये।
शिमला/शैल। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और हिमाचल प्रदेश को ग्रीन एनर्जी स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की वार्षिक ऊर्जा खपत लगभग 13 हजार मिलियन यूनिट है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की हरित नीतियों के परिणामस्वरूप सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और आगामी दो वर्षों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। ‘ग्रीन पंचायत कार्यक्रम’ के तहत प्रदेश की सभी पंचायतों में 500 किलोवाट क्षमता की ग्राउंड- माउंटेड सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। पहले चरण में 24 ग्राम पंचायतों में ऐसी परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 16 पंचायतों में कार्य आरंभ हो चुका है। इस कार्यक्रम के माध्यम से 150 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली से अर्जित राजस्व का 20 प्रतिशत भाग राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के अनाथ बच्चों और विधवाओं के कल्याण के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ऊना जिला स्थित पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना ने 15 अप्रैल 2024 को वाणिज्यिक संचालन शुरू किया, जिससे अब तक 79.03 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ और 22.91 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। ऊना की अघलौर सौर परियोजना से 21 मई 2025 से बिजली उत्पादन शुरू हुआ है, जिससे अब तक 5.89 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है। वहीं, भंजाल सौर ऊर्जा परियोजना ने 30 नवंबर 2024 को व्यावसायिक संचालन शुरू कर अब तक 8.57 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करते हुए 3.10 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में 31 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली तीन सौर ऊर्जा परियोजनाएं निष्पादन चरण में हैं, जबकि 41 मेगावाट क्षमता की चार परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की गयी हैं। इसके अतिरिक्त कांगड़ा जिला के डमटाल क्षेत्र में बंजर भूमि पर 200 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्रा स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लाहौल -स्पीति के लांगजा, हिक्किम, मुद और कोमिक जैसे दुर्गम क्षेत्रों के 148 घरों में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत सोलर ऑफ-ग्रिड सिस्टम स्थापित किए गये हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के अंतर्गत 250 किलोवाट से 5 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की जा रही हैं, जिनसे उत्पन्न बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदा जाएगा। अब तक 547 निवेशकों को लगभग 595.97 मेगावाट क्षमता की ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं, जिनमें से 403.09 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विद्युत खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, हिमऊर्जा द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड को 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आवंटित की गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की 120 माउंटिड सौर परियोजनाएं पहले ही आवंटित हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन, कंप्रेस्ड बायोगैस, भू-तापीय ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इन निरंतर पहलों के माध्यम से वर्ष 2026 तक हिमाचल प्रदेश को देश के अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्यों में शामिल करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार आगे बढ़ रही है।
शिमला/शैल। मण्डी के पड्डल मैदान में हिमाचल प्रदेश सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित जन संकल्प सम्मेलन राज्य की विकास यात्रा, नीतिगत बदलावों और जनकल्याणकारी उपलब्धियों का व्यापक मंच बना। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को जनसमर्थन का प्रतीक बना दिया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के संबोधनों में सरकार के तीन वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य के संकल्पों को विस्तार से रखा गया।
शिमला/शैल। क्या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हाईकमान की अपेक्षाओं पर खरे उत्तर पाएंगे? क्या वह भाजपा को चुनौती दे पाएंगे? क्या कांग्रेस को पुनः सत्ता की दहलीज तक पहुंचा पाएंगे? ऐसे अनेकों सवाल आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सामने सत्ता के गलियारों से लेकर सड़क तक खड़े हो गये हैं। क्योंकि नया प्रदेश अध्यक्ष तलाश करने में एक वर्ष का समय पार्टी का लग गया है। जब एक वर्ष से लेकर ब्लॉक स्तर तक की सारी कार्यकारिणीयों को भंग कर दिया गया था तब हाईकमान ने पर्यवेक्षकों की टीम संगठन के कर्मठ और सक्रिय कार्यकर्ताओं की तलाश के लिये भेजी थे। लेकिन इस टीम की रिपोर्ट पर कोई अमल नहीं हुआ। प्रदेश में संगठन की खराब हालत का दोष हर नेता ने सीधे हाईकमान के नाम लगाया परन्तु कोई असर नहीं हुआ। इस वस्तुस्थिति में यदि प्रदेश सरकार और संगठन के पिछले तीन वर्षों के रिश्तों तथा सरकार की उपलब्धियां पर नजर डालें तो यह सच्चाई सामने आती है कि सरकार के अब तक के कार्यकाल में हुए लोकसभा चुनाव में चारों सीटें पार्टी हार गयी और राज्यसभा हारने के साथ ही पार्टी के छः विधायक दलबदल कर गये। अब स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव किसी न किसी बहाने टाले जा रहे हैं। नगर निगम अधिनियम में संशोधन का असर यह हुआ है कि पार्षदों का एक बड़ा वर्ग विद्रोह के कगार पर पहुंच गया है। हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभाओं के चुनाव में हिमाचल सरकार के कुछ फैसले विशेष चर्चा का विषय रहे हैं। सरकार हर समय प्रदेश की कठिन वित्तीय स्थिति के लिए पूर्व की सरकार को लगातार दोष देती आ रही है। लेकिन आज तक पिछले सरकार के कार्यकाल में घटे भ्रष्टाचार का कोई भी मामला कायम नहीं कर पायी है। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता को दस गारंटियां देकर सत्ता में आयी थी। इन गारंटियों कि आज व्यवहारिक स्थिति क्या है इस पर सरकार के ब्यानी दावों के अतिरिक्त जमीन पर स्थिति पूरी तरह अलग है। पार्टी का कोई भी विधायक और कार्यकर्ता जमीनी सच्चाई पर कुछ भी खुलकर बोलने और सवाल पूछने की स्थिति में नहीं है। लेकिन जनता जो भुक्त भोगी है वह आगे-आगे पूरी तरह मुखर होती जायेगी। विपक्ष सरकार और व्यक्तिगत रूप से नेताओं के भ्रष्टाचार को निशाना बनायेगी। क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर देश की राजनीति जिस मुकाम पर पहुंच चुकी उसका असर हर प्रदेश पर होगा। प्रदेश भाजपा को पार्टी के राष्ट्रीय निर्देशों पर सरकार को ठोस प्रमाणों के साथ घेरने की बाध्यता आ जायेगी भले ही आज तक भाजपा का अघोषित समर्थन सुक्खू सरकार को रहा है। लेकिन आने वाले समय में स्थितियां एकदम बदल जायेगी। इस परिदृश्य में पार्टी के नये अध्यक्ष के सामने भारी चुनौतियां होगी। सरकार और संगठन को व्यवस्था परिवर्तन के जुमले से बाहर निकलना होगा। स्व. विमल नेगी की मौत प्रकरण सरकार से जवाब मांगेगा यह तय है। प्रशासन में पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना का सेवा विस्तार और फिर पुनर्नियुक्ति निश्चित रूप से उच्च न्यायालय के फैसले के बाद जनता में चर्चा का विषय बनेगा ही। क्योंकि उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका को मैनटेनेबल करार देकर गेंद राज्य सरकार के पाले में धकेल दी है। इन व्यवहारिक स्थितियों के परिदृश्य में अध्यक्ष का काम काफी चुनौती पूर्ण हो जायेगा।