


शिमला/शैल। सोलन नगर निगम के वार्ड संख्या 5 के उप-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अमरदीप पांजा ने शानदार जीत प्राप्त की है। अमरदीप पांजा ने कुल 524 वोट प्राप्त किए, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी पुनीत नारंग को 240 वोट मिले। इस चुनाव में 2 वोट नोटा के लिए डाले गये। भाजपा की इस जीत को क्षेत्र में पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। सोलन नगर निगम के इस उप-चुनाव में जनता ने भाजपा की नीतियों और विकास कार्यों पर मुहर लगाई है।
भाजपा प्रत्याशी अमरदीप पांजा की इस जीत पर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी और इसे पार्टी की बड़ी उपलब्धि बताया।
बिंदल ने कहा भाजपा की यह शानदार जीत वर्तमान सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के खिलाफ बहुत बड़ा फतवा है, हिमाचल सरकार के स्वास्थ्य मंत्री लगातार इस वार्ड ने घर घर जा रहे थे उसके बावजूद भी सरकार को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा को कांग्रेस से दो गुना से अधिक वोट प्राप्त हुए, यह सीधा सीधा जनता का वर्तमान सरकार के खिलाफ वोट है, सरकार की झूठी गारंटी, जनता पर बोझ के खिलाफ वोट है।
जयराम ठाकुर ने कहा की वर्तन सरकार लगातार जन विरोधी निर्णय ले रही है और उसके प्रति जनता का रोष इस मतदान में साफ दिखाई दे रहा है। सोलन में वार्ड नंबर 5 की जीत के लिए जनता का आभार एवं कार्यकर्ताओं को बधाई।
शिमला/शैल। देवभूमि संघर्ष समिति अवैध मस्जिदों और अवैध प्रवासियों के खिलाफ उठे रोष पर उभरे आन्दोलन का नेतृत्व कर रही है। इस संघर्ष समिति ने प्रदेश भर में धरने प्रदर्शन आयोजित किये हैं। अब यह चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम शिमला के आयुक्त की अदालत से 5 अक्तूबर को मस्जिद के खिलाफ फैसला नहीं आता है तो संघर्ष समिति जेल भरो आन्दोलन शुरू कर देगी। मस्जिद में अवैध निर्माण का मामला लम्बे अरसे से अदालत में लम्बित चल रहा है। यह अवैध निर्माण यदि हुआ है तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की सरकारों के समय में हुआ है। मस्जिद में हुये अवैध निर्माण के साथ ही चार-पांच हजार और अवैध निर्माण होने का खुलासा शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य ने स्वयं किया है। मस्जिद सरकार की जमीन पर बनी है यह खुलासा सदन में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने रखा है। अवैध प्रवासियों और स्टेट वैण्डरस को लेकर कमेटी बना दी गयी है। इस कमेटी की कोई बैठक होने और उसमें कोई इस संबंध में फैसला होने की कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं आयी है। लेकिन ऐसी जानकारी के बिना मंत्री विक्रमादित्य सिंह का यह ब्यान आ गया है कि रेडी-फड़ी लगाने वालों को अपना नाम भी डिस्प्ले करना होगा। इस ब्यान का संज्ञान कांग्रेस हाईकमान ने भी लिया है और मंत्री को अपना ब्यान एक तरह से वापस लेना पड़ा। सरकार को भी अधिकारिक तौर पर यह कहना पड़ा कि ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन इसी बीच स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने विक्रमादित्य सिंह के ब्यान का समर्थन कर दिया है। इस तरह सुक्खू सरकार के तीन मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विक्रमादित्य सिंह और धनीराम शांडिल एक तरह देवभूमि संघर्ष समिति का समर्थन कर गये हैं। कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर की भूमि पर्यटन विभाग को दिये जाने के खिलाफ खड़े हो गये हैं। इस तरह सुक्खू के चार मंत्री सरकार से अलग राय रखने वालों में गिने जाने लगे हैं। अवैध प्रवासी और मस्जिदों में अवैध निर्माण ऐसे मुद्दे बन गये हैं जिन पर कानूनी पक्ष कुछ और है तथा जन भावना कुछ अलग है। इस तरह इस समय जन भावना के दबाव में फैसला लेने का वातावरण बनाया जा रहा है। सरकार भी इन मुद्दों पर खामोश चल रही है अन्यथा दोनों मुद्दों पर समयबद्ध जांच बिठाकर इस समय उभरे तनाव के वातावरण को अलग मोड दे सकती थी। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है। इसलिये अवैध निर्माण के मामले में सब मामलों पर कानून के मुताबिक ही कारवाई करनी होगी। इस समय प्रदेश के कई छोटे-बड़े नेता भवन निर्माण व्यवसाय से जुड़े हुये हैं। संभव है कि इनके निर्माण में भी कई कमियों को नजर अन्दाज कर दिया गया हो। इसलिये मस्जिदों में भी हो रहे अवैध निर्माण पर कारवाई करना आसान नहीं होगा। इसी तरह किसी भी भारतीय नागरिक को अवैध प्रवासी करार देना आसान नहीं है। हर आदमी की गतिविधियों पर नजर रखना कानून और व्यवस्था के तहत प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिये किसी प्रवासी को अवैध करार देना कानून के तहत आसान नहीं है। इस तरह अवैध मस्जिद और अवैध प्रवासियों के मुद्दे को जिस तरह एक गैर राजनीतिक संगठन देव भूमि संघर्ष समिति को सौंप दिया है और पूरे आन्दोलन को हिन्दू संगठन के रोष का नाम दिया गया है। उसके राजनीतिक उद्देश्य कुछ अलग ही नजर आ रहे हैं। क्योंकि जब मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर पहला प्रदर्शन हुआ था उस समय भाजपा विधायक तक भी उसमें शामिल हो गये थे। संजौली में जो प्रदर्शन हुआ है और उसमें पुलिस को व्यवस्था बनाये रखने के लिए बल का भी प्रयोग करना पड़ा। उस प्रदर्शन में भाजपा संघर्ष के लोग भी शामिल थे। जिनको चिन्हित करके उनके खिलाफ मामले बनाये गये हैं। लेकिन इस प्रदर्शन के बाद भाजपा ने एक निर्देश जारी करके अपने हर स्तर के नेताओं को इस मुद्दे पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से रोक दिया है। इस तरह भाजपा रणनीतिक तौर पर इस आन्दोलन से सक्रिय तौर पर अलग हो गयी है। अब यह आन्दोलन हिन्दू संगठनों का ही विषय बन गया है। जिसका नेतृत्व देवभूमि संघर्ष समिति के हाथ में है। लेकिन इस मुद्दे पर जिस तरह कांग्रेस के मंत्री न चाहते हुये भी भागीदार बन गये हैं वह आगे चलकर सरकार के लिये नुकसानदेह होगा। क्योंकि इस सरकार को बने हुये दो वर्ष हो रहे हैं। मस्जिद निर्माण और दूसरे निर्माण में अवैधता होना मंत्री स्वीकार कर रहे हैं। मस्जिद सरकार की जमीन पर है यह भी मंत्री ने सदन में कहा है। ऐसे में यह सवाल उठेगा ही की अवैधता के इन मामलों पर सरकार ने क्या कारवाई की है और अवैधता की जानकारी कब और कैसे हुई?
शिमला/शैल। कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में प्रतिवर्ष एक लाख रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रदेश के युवाओं से वादा किया था। यह रोजगार प्राइवेट और सरकारी दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध करवाया जाना था। प्रदेश में सरकार ही सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। इसलिये सरकार में कितने पद विभिन्न विभागों में खाली है इसका पता लगाने के लिये एक मंत्री स्तरीय कमेटी बनायी गयी थी। इस कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार में 70,000 पद खाली होने की सूचना आयी थी। सरकार में अराजपत्रित कर्मचारियों की भर्ती करने के लिये अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड गठित था। लेकिन इस बोर्ड पर भ्रष्टाचार और परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगने के कारण इसे भंग कर दिया गया। भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मामलों पर आपराधिक मामले दर्ज किये। इन मामलों की जांच अभी तक चल रही है। अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भंग करने के बाद इसका काम भी प्रदेश लोक सेवा आयोग को सौंप दिया गया था। प्रदेश के रोजगार कार्यालय में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या नौ लाख से बढ़ गयी है। बेरोजगारी के मामले में प्रदेश देश के पहले छः राज्यों में शामिल हो गया है। प्रदेश में बेरोजगारी की दर लगातार बढ़ रही है। उद्योगों के प्रदेश से पलायन करके दूसरे प्रदेशों में जाने के समाचार बराबर आ रहे हैं। उद्योगों के पलायन को विपक्ष लगातार मुद्दा बना रहा है। नये उद्योग नहीं के बराबर आ रहे हैं। इस वस्तुस्थिति में युवाओं को रोजगार कैसे मिल पायेगा यह एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है।
दूसरी और सरकार मंत्रिमंडल की लगभग हर बैठक में किसी न किसी विभाग में भर्तियां करने की अनुशंसा करती आ रही है। पिछले दिनों सरकार के एक ब्यान में प्रदेश में तीस हजार लोगों को नौकरियां देने का दावा किया गया है। लेकिन प्रदेश के बेरोजगार सरकार के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उन्होंने सरकार के आंकड़ों को एकदम गलत करार दिया है। बेरोजगार युवाओं ने शिमला में विधानसभा सत्र के दौरान एक प्रदर्शन में यहां तक कह दिया कि या तो उन्हें नौकरी दे दो या गोली मार दो। युवाओं की यह हताशा एक गंभीर चेतावनी है। आने वाले दिनों में युवाओं के आक्रोश और रोष का तंत्र को सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह जांचना आवश्यक हो जाता है कि क्या सरकार के दावे और आंकड़े जमीनी हकीकत बन पाये हैं या नहीं। इसके लिये विधानसभा सत्र में सदन में विधायकों द्वारा इस संद्धर्भ में पूछे गये परोक्ष/अपरोक्ष सवालों पर सरकार द्वारा दिये गये उत्तरों पर नजर डालने से बेहतर और कोई साधन नहीं हो सकता।
सत्र के आखिरी दिन दस तारीख को कुछ विधायकों द्वारा पूछे गये प्रश्न और उनके उत्तर पाठकों के सामने रखना आवश्यक हो जाता है। विधायक भुवनेश्वर गॉड का तारांकित प्रश्न था गत तीन वर्षों में दिनांक 15 -01-24 तक विभिन्न विभागों/ निगमों/बोर्डों में कितने मल्टी पर्पज (एमपीडब्ल्यू) सरकार द्वारा किस-किस नीति के तहत नियुक्त किये गये ब्योरा विभाग वार दें। इसका जवाब आया सूचना एकत्रित की जा रही है। दूसरा प्रश्न भी भुवनेश्वर गॉड का ही था गत तीन वर्षों में विभिन्न विभागों/बोर्डों/ निगमों में किस-किस कंपनी को आउटसोर्स भर्ती हेतु नियुक्त/कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है और कितने कर्मचारी आउटसोर्स पर इन कंपनियों द्वारा रखे गये तथा इन भर्तियों हेतु क्या-क्या मापदण्ड रखे गये ब्योरा विभागवार/पदवार दें। इसका जवाब भी सूचना एकत्रित की जा रही है ही आया है।
इसी दिन विधायक दीप राज और जीतराम कटवाल का संयुक्त प्रश्न था गत डेढ़ वर्ष में दिनांक 31-7-24 तक सरकार द्वारा सरकारी तथा निजी स्तर पर कितने लोगों को रोजगार प्रदान किया गया तथा प्रदेश में बेरोजगारी दर क्या है? इसी दिन विधायक केवल सिंह पठानिया का अंतारंकित प्रश्न था प्रदेश में वर्तमान में समस्त श्रेणियां में कुल कितने पद रिक्त हैं, इनमें से कितने पद काफी समय से बैकलॉग में चल रहे हैं और सरकार द्वारा गत वर्ष में 15-1-24 तक कितने लोगों को रोजगार प्रदान किया गया ब्योरा विभागवार तथा पदवार दें- इसका जवाब भी सूचना एकत्रित की जा रही है -ही आया है। यह कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न ही पाठकों के सामने रखे गये हैं इस संद्धर्भ में पूछे गये सभी प्रश्नों का उत्तर इसी तरह टाल दिया गया है। सरकार को सत्ता में आये दो वर्ष होने जा रहे हैं। बेरोजगारी एक गंभीर समस्या होती जा रही है बेरोजगारी पर तो सरकार से ठोस जवाब चाहिये। यदि अब भी सरकार इस पर कुछ भी ठोस बताने को तैयार नहीं है तो सरकार को लेकर क्या आकलन बनता है इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है।
शिमला/शैल। हिमाचल का वित्तीय संकट कहीं कांग्रेस के अन्दर एक और विद्रोह का कारण न बन जाये इसकी आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। इसका संकेत उस समय स्पष्ट हो गया था जब पिछले दिनों महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा अलका लांबा को भाजपा विधायक पूर्व अध्यक्ष हंसराज के खिलाफ एक महिला द्वारा एफ.आई.आर. करवाने के बाद भी प्रदेश पुलिस द्वारा आगे की कारवाई नहीं की गयी। इससे यह सन्देश गया था कि शायद राज्य सरकार इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। महिला कांग्रेस ने विधानसभा के बाहर ही इस मामले में प्रदर्शन किया था। महिला कांग्रेस का यह प्रदर्शन भाजपा विधायक से ज्यादा अपनी ही सुक्खु सरकार के खिलाफ था। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस कार्यकर्ता कहीं न कहीं अपनी ही सरकार की कार्य प्रणाली से खुश नहीं हैं। अब सरकार का वित्तीय संकट खुलकर सामने आ गया है जब मुख्यमंत्री स्वयं इस संकट पर विधानसभा में अपना ब्यान रख चुके हैं तब उसके बाद यह कहने का कोई अर्थ नहीं रह जाता है कि कोई संकट नहीं है। यह फैसला तो वित्तीय अनुशासन लाने के लिये लिया गया था। संकट का सच उस समय स्वयं खुलकर सामने आ गया जब कर्मचारी और पैन्शनरों को समय पर भुगतान नहीं हो सका। इस संकट के लिये कौन जिम्मेदार है यह सुनिश्चित करने से ज्यादा यह महत्वपूर्ण हो गया है कि इस संकट का असर कहां-कहां पड़ेगा। यह स्पष्ट है कि संकट के चलते चुनाव के दौरान जनता को दी गयी एक भी गारंटी पर सरकार व्यवहारिक रूप से अमल नहीं कर पायेगी। बल्कि पहले से मिल रही सुविधाओं पर कटौती की जाने लगी है। यह स्थिति किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता के लिये सुखद नहीं हो सकती क्योंकि उसे जनता के बीच जाना होता है और उसके सवालों का जवाब देना होता है। कांग्रेस का कार्यकर्ता इसी दुविधा से गुजर रहा है। अभी चार राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा प्रदेश की स्थिति को इन राज्यों में उछालेगी। विश्लेषकों के मुताबिक राज्य की वित्तीय स्थिति पर सदन में मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा ब्यान नहीं रखा जाना चाहिए था। यह ब्यान रखना अपने में आत्मघाती कदम बन जाता है। माना जा रहा है कि सुक्खू के सलाहकार इस मामले में भारी गलती कर गये हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो यह उभर रहा है कि जब चालू वित्त वर्ष के लिये फरवरी में सदन में बजट पारित किया गया था तब उसमें वर्ष के अन्त में सिर्फ 10783.87 करोड़ का घाटा दिखाया गया था। जिसका अर्थ यह है कि वर्ष के राजस्व और पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिये यदि सरकार को कोई कर्ज भी लेना पड़ता है तो वह इससे अधिक का नहीं हो सकता था। क्योंकि बजट में तो हर चीज का सही आकलन और हिसाब रखा जाता है। सदन में पारित बजट के बाद प्रदेश की वित्तीय स्थिति का इस मुकाम तक पहुंच जाना अपने में कई गंभीर स्वर खड़े कर देता है। बजट दस्तावेज के आईने में वर्तमान स्थिति का उभरना सामान्य समझ के बाहर की बात है। फिर अभी सरकार को तीन वर्ष का और कार्यकाल पूरा करना है। यह स्थिति प्रदेश के कार्यकर्ताओं से ज्यादा कांग्रेस हाई कमान के लिए चिंताजनक है। क्योंकि आज यदि किन्हीं कारणों से प्रदेश में चुनाव की स्थिति खड़ी हो जाये तो कांग्रेस का पुनः सत्ता में आना संभव नहीं होगा। यह है सदन में पारित 2024-25 का दस्तावेज। इस बजट के बाद कई सेवाओं और वस्तुओं के दाम बढ़ाये गये हैं। इस बढ़ौतरी के बाद भी वेतन भत्ते निलंबित करने की स्थिति आना अपने में चिंताजनक है।
