शिमला/शैल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 14 अप्रैल को तालाबन्दी के दूसरे चरण की घोषणा की थी तब यह आश्वासन भी दिया था कि 20 अप्रैल से इसमें कुछ क्षेत्रों मे राहत भी दी जायेगी। प्रधानमंत्री के इस आश्वासन के बाद 15 अप्रैल को ही केन्द्रिय गृह सचिव की ओर से दिशा निर्देश भी जारी कर दिये गये । इन निर्देशों में कुछ गतिविधियों को 20 अप्रैल से छूट देने का भी उल्लेख किया गया। लेकिन इस छुट के लिये शर्त भी लगा दी है कि सभी कार्यस्थलों पर सोशल डिस्टैन्सिंग आदि की अनुपालना सुनिश्चित की जोयगी। Before operating these relaxations, States/UTs/District Administrations shall ensure that all preparatory arrangements with regard to social distancing in offices, work places, factories and establishments as also other sectoral requirements are in place. इसका अर्थ है कि जहां पर इन प्रावधानों की अनुपालना नही होगी वहां पर कोई भी कार्य शुरू नही हो पायेगा। केन्द्र के इन दिशा निर्देशों में राज्य सरकारें अपने स्तर पर कोई बदलाव नही कर पायेगी यह भी स्पष्ट कर दिया है। State /UT Governments shall not dilute these guidelines issued under the Disaster Mangement Act 2005 in any manner and shall strictly enforce the same. State /UT Governments, May, however, impose stricter measures than these guidelines as per requirement of the local areas.
इस समय उद्योगों की गतिविधियां पूरी तरह बन्द हैं और करोड़ों लोग इससे प्रभावित हो गये हैं। इन गतिविधियों को अब शुरू करने की छूट दी गयी है। इस छूट में यह कहा गया है कि यह स्थापनाएं अपने उद्योगों में अपने कामगारों के ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। यदि उनके यहां इनके ठहरने कि सुविधा नही है तो वह इसके लिये उनके साथ लगते भवनों को लें और वहां इनके ठहरने का प्रबन्ध करें i. Industries operating in rural areas i.e. outside the limits of municipal corporations and municipalities.
ii. Manufacturing and other industrial establishments with access control in special Economic Zone (SEZs) and Export Oriented Units (EoUs) industrial estates , and industrial townships these establishments shall make arrangements for stay of workers within their premises as far as possible and or adjacent buildings and for implementation of the standard oprating / protocol (SOP) as referred to in para 21 (ii) below. The transportation of workers to work place shall be arranged by the employers in dedicated transport by ensuring social distancing
iii. Manufacturing units of essential goods, including drugs pharmaceuticals, medical devices, their raw material and intermediates.
iv. Food processing industries in rural areas. i.e. outside the limits of municipal corporations and municipalities.
v. Production units which require continuous process and their supply chain.
vi. Manufacturing of IT hardware.
vii. Coal production, mines and mineral production, their transportation, supply of explosives and activities incidental to mining operations.
viii. Manufacturing units of packaging material.
ix. Jute industries with staggered shifts and social distancing.
x. Oil and gas exploration/refinery.
xi. Brick kilns in rural areas i.e. outside the limits of municipal corporations and municipalities.
Construction activities, Listed as below, will be allowed to operate:
i. Construction of roads, irrigation projects, buildings and all kinds of industrial projects, including MSMEs. In rural areas i.e. outside the limits of municipal corporations and municipalities: and all kinds of projects in industrial estates.
ii. Construction of renewable energy projects.
iii. Continuation of works in construction projects, within the limits of municipal corporations and municipalities, where workers are available on site and no workers are required to be brought in from outside (in situ construction)
इसी तरह कृषि कार्यों को छूट दी गयी है। उसमें यह कार्य किया जा सकेंगे। इनमें सोशल डिस्टैसिंग की अनुपालना आवश्यक शर्त होगी जो हर कार्य के लिये अनिवार्यता रहेगी। कृषि कार्यों में यह सब शामिल रहेगा।
Agricultural and related activities:
All agricultural and horticultural activities to remain fully functional, such as:
i. Farming operations by farmers and farm workers in field.
ii. Agencies engaged in procurement of agriculture products, including MSP operations.
iii. 'Mandis' operated by the Agriculture Produce Market Committee (APMC) as notified by the state /UT Government (e.g. satellite mandis) Direct marketing operations by the state /UT Government or by industry, directly from farmers /group of farmers, FPOs’ co-operativies etc. States /UTs may promote decentralized marketing and procurement at village level.
iv. Shops of agriculture machinery, its spare parts (including its supply chain) and repairs to remain open.
v. Custom Hiring Centres (CHC) related to farm manhinery.
vi. Manufacturing, distribution and retail of fertilizers, pesticides and seeds.
vii. Movement (inter and intra State ) of harvesting and sowing related machines like combined harvester and other agriculture /horticulture implements.
कृषि, मनरेगा और उद्योग ऐसे अदारें हैं जहां पर करोड़ों लोग अपना रोज़गार पाते हैं। कृषि और मनरेगा के कार्यों का व्यवहारिक ज्ञान रखने वाले जानते हैं कि इनमें सोशल डिस्टैंसिंग की अनुपालना क्रियात्मक रूप से संभव हो ही नही सकती है। इनके साथ उद्योग तीसरा बड़ा अदारा है रोज़गार का। अब उद्योगों के लिये यह शर्त लगा दी गयी है कि वह अपने कामगारों के ठहरने की व्यवस्था अपने उद्योग के अन्दर ही करें या उसके साथ लगते भवन लें। मज़दूरों को लाने के लिये परिवहन व्यवस्था भी यह उद्योग स्वयं सुनिश्चित करेंगे। उद्योगों के लिये यह शर्त पहली बार रखी गयी है। आज जब सारी गतिविधियों पर विराम लगा हुआ है तब यह उद्योग ऐसी व्यवस्था कैसे कर पायेंगे यह अपने में बड़ा सवाल बन गया है। इस महामारी के परिप्रेक्ष में यह दिशा निर्देश जारी किये गये हैं इनकी अवहेलना करने पर कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है और इन्ही दिशा निर्देशों में उसका भी जिक्र दर्ज है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि आज कोई भी उद्योग अपने कामगारों को अपने यहां ठहराने की व्यवस्था नही कर पायेगा। क्योंकि यह व्यवस्था खड़ी करने में महीनों के हिसाब से समय लग जायेगा। इसलिये बहुत संभव है कि उद्योगपति इन हालात में उ़द्योग ईकाई को चलाने की बजाये उसे बन्द रखना ही पसन्द करेंगे। इसी के साथ यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या भविष्य में लगने वाले उद्योगों के लिये यह व्यवस्था बनाने की शर्त अनिवार्य की जायेगी?
हिमाचल सरकार ने भी केन्द्र की ओर से जारी इन निर्देशों पर अपनी मोहर लगा दी है। प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा 18 अप्रैल को जारी पत्र में केन्द्र के निर्देशों में कोई बदलाव नही किया गया है। इस संबध में जब पत्रकार वार्ता में मुख्यमन्त्राी से पूछा गया तो वह केवल यही कह पाये कि इस पर विचार किया जायेगा। इससे स्पष्ट हो जाता है कि राज्य सरकार ने इस विषय में कोई विचार ही नही किया है। ऐसे में प्रदेश में उद्योग कार्यों के शुरू हो पाने पर अभी तक प्रश्नचिन्ह बना ही हुआ है।

शिमला/शैल। प्रदेश के दो सांसद रामस्वरूप शर्मा और किश्न कपूर तालाबन्दी के दौरान दिल्ली से जोगिन्दरनगर और धर्मशाला अपने घर - चुनाव क्षेत्र में पहुंच गये हैं। लाहौल-स्पिति के कुछ किसान जो कुल्लु-मनाली में फसें हूए थे उन्हे लाहौल पहुंचाने के लिये बस का प्रबन्ध किया गया। अब इसी तर्ज पर पांगी से भी ऐसी ही मांग आ गयी है। सांसदों के आने को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। इन लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज किये जाने की मांग उठ गयी है। डी जी पी को इस आशय की शिकायतें दी गई है। क्योंकि आम आदमी के खिलाफ तालाबन्दी की उल्लंघना करने पर आपराधिक मामले दर्ज किये जा रहे है। इस गणित से इन सांसदों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग को खारिज नही किया जा सकता। फिर जब भाजपा प्रवक्ता और मिडिया सह प्रबन्धकों ने कांग्रेस के आरोपों का यह कहकर जबाव दिया है कि यह लोग शाहीनबाग में बिरयानी खाने या जे एन यू में भारत विरोधी नारे लगाने नही गये थे उससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। क्योंकि जब तालाबन्दी में जो जहां है वह वहीं रहे के निर्देश प्रधानमंत्री ने दिये थें तब इनका आना उन निर्देशों का स्वतः ही उल्लंघना हो जाता है।
लेकिन यहां सवाल न इस उल्लंघना का है और न ही इनके खिलाफ कोई मामला दर्ज करने का है। क्योंकि यह जिम्मेदार लोग हैं और जनप्रतिनिधि हैं। इस समय इनका अपनी जनता के पास होना आवश्यक है। न ही यह लोग इस बिमारी के कोई संक्रमित मामले है। न ही इन लोगों ने किसी जांच या अन्य प्रक्रिया से गुजरने का विरोध किया है। दिल्ली से यह लोग वाकायदा पास लेकर निकले होंगे और इसीलिये इनको रास्ते में किसी ने रोका नही। कहीं यह आशंका नही उभरी की यह लोग अपने घर या क्षेत्र में किसी को संक्रमित करने के कारण बनेगें। इसलिये इन लोगों के खिलाफ तालाबन्दी की उल्लंघना करने पर कोई मामला दर्ज किये जाने की मांग को जायज नही ठहराया जा सकता है।
इस मामले का जो सही मे गंभीर पक्ष बनता है उस पर न तो किसी शिकायतकर्ता का ध्यान गया है न ही कांग्रेस ने बतौर विपक्ष उसे उठाया है। इस समय पूरे देश में करोड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घरों को जाना चाहते है। तालाबन्दी की उल्लंघना को लेकर हजारों लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज हो चुके हैं। क्योंकि किसी को भी बिना अनुमति के अपने स्थान से बाहर जाने की आज्ञा नही हैं। हिमाचल में भी लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर हैं। यह लोग इस समय पूरी तरह बेकार और बेरोजगार होकर बैठे हैं। यह सब अपने घरों को वापिस जाना चाहते हैं। फिर यह लोग इन्ही सांसदों की तरह कोई संक्रमित भी नही है जिससे इनसे दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा हो। ऐसे में क्या महज़ एक आशंका के आधार पर इन लोगों को अपने घर जाने से रोकना तर्कसंगत होगा। जब सांसद संक्रमित नही हैं और उससे आगे संक्रमण का कोई खतरा नही है तो उसी तर्ज पर इन मजदूरों से ऐसा खतरा कैसे हो सकता है। आज इन सांसदों को आगे आकर इन मजदूरों को अपने घर पहुंचाने के प्रबन्ध करने होंगे। अन्यथा यह आरोप लगना स्वभाविक है कि समर्थ लोगों के लिये नियम कानून की व्याख्या अलग है और गरीब के लिये अलग। क्योंकि जब सांसदों के लिये पास बन सकते हैं तो इन मजदूरों के लिये क्यों नही।

शिमला/शैल। मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर ने भी केन्द्र की तर्ज अपने मन्त्रीयों, विधायकों आदि के वेत्तन भत्तों में एक वर्ष के लिये 30% की कटौती की घोषणा की है। इसी के साथ विधायक क्षेत्र विकास निधि को भी दो वर्ष के लिये निरस्त कर दिया है। इस तरह होने वाली सारी बचत को कोरोना से लड़ने के प्रयासों में निवेश किया
जायेगा। सरकार का यह कदम सराहनीय है और इस समय ऐसे कदमों की आवश्यकता भी है। हिमाचल में कोरोना का प्रकोप उतना नही है जितना देश के अन्य राज्यों में हैं। इसका श्रेय भी जयराम सरकार को ही जाता है जिसने प्रदेशभर में लाकडाऊन के स्थान पर कर्फ्यू आदेशित किया। सरकार और प्रदेश को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ी हैं क्योंकि नये वित्तिय वर्ष के पहले ही दिन की शुरूआत कर्ज से करनी पड़ी है। जबकि पहले ही प्रदेश कर्ज के चक्रव्यूह में चल रहा है। ऐसे में आने वाले समय में प्रदेश को इस कर्ज के चक्रव्यूह से निकालना और आर्थिक स्थिरता प्रदान करना एक बड़ी चुनौती होगा। सरकार ने जहां मन्त्रीयों, विधायकों के वेत्तन भत्तों में कटौती की है वहीं पर क्या सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिये भी ऐसी ही कटौती आदेशित की जायेगी या नही। इसको लेकर स्थिति अभी तक स्पष्ट नही हैं। यह सवाल प्रदेश के प्रशासनिक हल्कों में इसलिये चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि प्रदेश में सबसे अधिक खर्च कर्मचारियों के वेत्तन भत्तों पर ही होता है। कई राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के वेत्तन भत्तों में ऐसी कटौती कर भी चुकी है। वैसे अभी तक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों की ओर से ऐसी कोई पेशकश आयी भी नही हैं।
जब से प्रदेश में कर्फ्यू चल रहा है उसी दिन से आर्थिक उत्पादन की सारी गतिविधियों पर विराम लग गया है। पिछले पूरे वर्ष सरकार प्रदेश में नया निवेश लाने के प्रयासों में लगी रही है। इसके लिये 93000 करोड़ के एमओयू भी हस्ताक्षरित कर लिये गये थे। लेकिन इन प्रयासों के परिणाम ज़मीन पर आने से पहले ही कोरोना ने सब कुछ को ग्रहण लगा दिया है। इस ग्रहण से निकट भविष्य में शीघ्र ही छुटकारा पाकर प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को फिर से एकदम गति दे पाना भी संभव नही हो पायेगा यह स्पष्ट दिख रहा है। आर्थिक गतिविधियों का रूकना किसी भी गणित से श्रेयस्कर नही होता है। ऐसे में जहां यह वेत्तन भत्तों में कटौती की गयी है वहीं पर सरकार को आवश्यक खर्चो और भ्रष्टाचार पर तुरन्त प्रभाव से रोक लगाने की आवश्यकता होगी। इस समय जो राजनीतिक नियुक्तियां मुख्यमन्त्री सचिवालय से लेकर विभिन्न निगमों/बोर्डों में की गयी हैं उनके औचित्य पर निष्पक्षता से विचार करने की आवश्यकता है। क्योंकि जब विकासात्मक कार्यों पर विराम की स्थिति आ गयी है तब ऐसी नियुक्तियों पर स्वभाविक रूप से ही प्रश्न उठने लग जायेंगे । जब प्रदेश के उच्च न्यायालय ने ही कोरोना के चलते अपने न्यायायिक कार्यों पर कुछ समय के लिये विराम लगा रखा है तब वहां पर नियुक्त हुए अधिवक्ताओं की सेवाओं का उतने ही काल के लिये क्या औचित्य रह जायेगा।
अभी सरकार ने रेरा प्राधिकरण का गठन किया है। इसमें उच्च न्यायालय के समकक्ष नियुक्तियां की गयी हैं। जब कोरोना के चलते सारी व्यवसायिक गतिविधियों पर विराम लग गया है तब रेरा में क्या काम हो पायेगा। क्या कोरोना में भी बिल्डरों की गतिविधियां चलती रहेंगी। ऐसे कई अन्य संस्थान हैं जिन्हे थोड़े समय के लिये बन्द करके बचत की जा सकती है। क्योंकि जब नये वित्तिय वर्ष के पहले ही दिन कर्ज लेने की नौबत आ खड़ी हुई है तब ऐसे हर पद को फिज़ूल खर्ची माना जायेगा जिसके बिना सरकार का काम चल सकता है। जिन लोगों को सेवानिवृति के बाद पुनःनियुक्तियां सेवा विस्तार दिये गये हैं इस समय ऐसे मामलों की समीक्षा किया जाना आवश्यक है। क्योंकि सांसदो और विधायकों की क्षेत्र विकास निधियों को निःरस्त कर दिया गया है इसका सीधा प्रभाव जनता के विकास कार्यों पर पड़ेगा। कुछ विधायकों ने वेत्तन भत्तों पर की गयी कटौती पर तो कोई एतराज़ नही उठाया है लेकिन क्षेत्र विकास निधि के बन्द किये जाने पर अपनी नाराज़गी जाहिर की है। यह स्वभाविक है कि जब फील्ड में विकास कार्य प्रभावित होने शुरू होंगे तो हर आदमी का ध्यान उन सब चीजों की ओर जायेगा जो उसकी नज़र में अनुत्पादक खर्चें होंगे।
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You can let each supplier have a page that he or she can edit. To see this in action you will need to create a users who is in the suppliers group.
Create one page in the growers category for that user and make that supplier the author of the page. That user will be able to edit his or her page.
This illustrates the use of the Edit Own permission.