शिमला/शैल। क्या हिमाचल प्रदेश में कोरोना के मामलों में तब्लीगी जमानत के लोगों के प्रदेश में आने से बढ़ौत्तरी हुई है? क्या यह लोग अपनी पहचान छिपा रहे हैं? क्या यह समुचित जानकारी न होने के कारण ऐसा कर रहे हैं या जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। यह सारे सवाल इस समय प्रमुख चर्चा में चल रहे हैं क्योंकि सोशल मीडिया में जिस तरह के पोस्ट देखने को मिल रहे हैं उससे यह सारी आशंकाएं उठ खड़ी हुई हैं। इन्ही आशंकाओं के चलते मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर ने प्रदेश के सभी ज़िला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में आये दिल्ली की निज़ामुद्दीन तब्लीगी जमात के लोगों को चिन्हित करके उन्हें जांच के लिये ले जाया जाये। इसके लिये मुख्यमन्त्री ने इन लोगों से आग्रह भी किया है कि वह स्वेच्छा से अपने और जनहित में जांच के लिये आगे आयें। इसी के साथ मुख्यमन्त्री ने इन्हे चेतावनी भी दी है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से आगे न आया और बाद में पकड़ा गया तो उसके खिलाफ और उसे आश्रय देने वाले के खिलाफ भी कड़ी कारवाई की जायेगी। मुख्यमन्त्री के इस आग्रह के बाद डीजीपी एस आर मरड़ी ने भी स्पष्ट निर्देश जारी कर दिये हैं। इन निर्देशों के मुताबिक ऐसे लोगों के खिलाफ पकड़े जाने पर हत्या और हत्या के प्रयास के मामले दर्ज करके आपराधिक कारवाई की जायेगी। डीजीपी ने इसके लिये स्वेच्छा से सामने आने का समय 5 अप्रैल शाम तक का दिया है। यह समय सीमा खत्म होने तक कितने लोग सामने आये हैं या इसके बाद कितने लोगों को पुलिस और प्रशासन खोज पाया है इस पर अभी तक कोई जानकारी सामने नही आयी है।
प्रदेश में अब तक कोरोना के 14 पाजिटिव मामले सामने हैं। इनमें से सात मामले सोलन और सात ही कांगड़ा से हैं। दोनों जिलों में एक-एक मौत भी हो चुकी है। सोलन के बद्दी क्षेत्र में जिस महिला की कोरोना के कारण मौत हो चुकी है उसके साथ आये चारों लोग पाजिटिव पाये गये हैं और वह ईलाज के लिये दिल्ली भी चल गये हैं इनके अतिरिक्त इसी बद्दी नालागढ़ क्षेत्र से तीन और लोग पाजिटिव पाये गये है और इन्हे आईजीएमसी शिमला भेज दिया गया है। यह तीनों गाजियावाद के रहने वाले हैं। ऊना में भी तीन पाजिटिव मामले सामने आये थे जिन्हे टांडा मैडिकल कालिज में भेज दिया गया है। यह लोग मण्डी के रहने वाले हैं और यह ऊना में मस्जिद में रह रहे थे तथा निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में गये थे। तब्लीगी जमात के 85 लोगों के खिलाफ 17 मामले दर्ज किये जा चुके हैं इनमें बद्दी में 45 और ऊना में 14 लोगों के खिलाफ मामलें हैं सिरमौर के ददाहू में भी एक विनित अग्रवाल के खिलाफ मामला दर्ज हैं। दो लोगों द्वारा सामाजिक शर्मिंदगी के चलते आत्महत्या भी कर ली गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 407 मामलों में खून के सैंपल लिये गये हैं। 4352 लोगों को निगरानी में रखा गया है। 1892 लोग 28 दिन की आईसोलेशन की अवधि पूरी कर चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने तब्लीगी जमात के 204 लोगों को अब तक चिन्हित किया है और इन सबको संगरोधन में भेज दिया गया है। इनमें सबसे ज्यादा 73 बद्दी, 39 ऊना, 35 सिरमौर , 23 शिमला, 20 चम्बा, 10 कांगड़ा और 4 मण्डी से हैं। डीजीपी के अनुसार कफ्रर्यू लगने के बाद प्रदेश में 358 मामले दर्ज किये गये और 372 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी के साथ 25 वाहनों को भी जब्त किया गया है।
इन अधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट हो जाता है कि प्रदेश में तब्लीगी जमात के लोगों के कारण कोरोना के मामले बड़े हैं और आगे बड़ने की आशंका है जिसके चलते सख्ती से निपटने की चेतावनी भी जारी कर दी गयी है। जमात के लोग इसलिये खतरा माने जा रहे हैं क्योंकि वह निजामुद्दीन मरकज में शिरकत करके प्रदेश में आये है और वहां से संक्रमण के वाहक होने का अनचाहे ही माध्यम बन गये हैं। निजा़मुद्दीन मरकज को लेकर पुलिस में मामले दर्ज हो चुके हैं। इनकी जांच में सामने आयेगा कि इनके खिलाफ लाकडाऊन की अवेहलना का मामला उस बिल्डंग की चार दिवारी के भीतर रहते हुए भी बनता है या नही। कानून के जानकारों के मुताबिक कर्फ्यू और तालाबन्दी की अवेहलना भवन की चार दिवारी के भीतर नही बनती है। इसी के साथ यह भी जांच में ही सामने आयेगा कि उस सम्मेलन में शामिल कितने लोग पहले से ही संक्रमित होकर वहां आये और फिर दूसरो में सक्रमण फैलाने का कारण बने। क्योंकि कई बार जानकारी के अभाव में भी ऐसी गलतीयां हो जाती हैं।
ऊना में ही जहां मण्डी के रहने वाले तीन लोग पकड़े गये है वहीं पर अम्ब में कार्यरत एक ज्यूडिशियल अधिकारी श्रीमति रोज़ी दहिया ऊना अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में 20-03-2020 को कोरोना संक्रमण के लिये भर्ती हुई थी। लेकिन आईसोलेशन के नियमों का उल्लघंन करते हुए देर शाम अपने पति के साथ अस्पताल में घूमी भी और रात को पति के ही साथ वहां रही भी। ज़िलाधीश ऊना ने इसका कड़ा संज्ञान लेते हुए सीएमओ को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने के आदेश किये हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जब एक जिम्मेदार न्यायिक अधिकारी इस तरह से आईसोलेशन के नियमों की अस्पताल में भर्ती होने के बाद अवेहलना करता है तो निजा़मुद्दीन मरकज से आने वाले तब्लीगीयों से नियमों की जानकारी की कितनी अपेक्षा की जा सकती है।

शिमला/शैल। कोरोना की आपदा आने के बाद एक पी एम फण्ड की स्थापना की गयी है। इसमें प्रधानमंत्री, रक्षा मत्री, वित मंत्री आदि कई मंत्री इस केयर फण्ड के सदस्य बनाये गये हैं। इस फण्ड में कई उद्योगपतियों और अन्य लोगों ने सैंकड़ों करोड़ का दान दिया है। लेकिन इस फण्ड पर यह सवाल उठने शुरू हो गये है कि क्या यह एक सरकारी फण्ड है और इसका भी बाकायदा आडिट होगा। इसमें प्रधानमंत्री और जो अन्य मंत्री शामिल हैं क्या वह बतौर मंत्री शमिल हैं या व्यक्तिगत स्तर पर शामिल हैं। यह सवाल इस लये उठ रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री रिलीफ फण्ड के नाम से पहले से ही एक कोष स्थापित है। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबन्धन के नाम पर भी एक कोष केन्द्र से लेकर राज्यों तक स्थापित है। इस समय इसी आपदा प्रबन्धन के नाम पर सारे राहत कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह एक गैर सरकारी कोष है। इस कोष पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कड़ी प्रतिक्रिया जारी की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष में पहले से ही पर्याप्त फंड पड़ा है। इस फण्ड को तो खर्च नही किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री के नाम पर इस विपदा के समय एक नए केअर फंड की स्थापना करने की क्या जरूरत आन पड़ गई, केंद्र सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए।
राठौर ने कहा है कि हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री केअर फंड की स्थापना के साथ ही उनके निकट माने जाने वाले बड़े उद्योगपतियों ने इस केयर फंड में बड़े पैमाने में पैसा डाल दिया है। उन्होंने इस केयर फंड की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सन्देह व्यक्त करते हुए कहा है कि इसमें उनके मित्र उद्योपतियों के साथ किसी भी बड़ी सांठगांठ से भी इंकार नही किया जा सकता।
राठौर ने कहा है कि भाजपा देश मे लोगों की सहायता के घड़याली आंसू बहा रही है। भाजपा लोगों की सेवा कम और प्रधानमंत्री के महिमा मंडल व प्रचार में ज्यादा जुटी है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस और कई स्वयमसेवी सगंठन पूरी ईमानदारी से लोगों की हरसंभव मदद कर रहें है, जबकि भाजपा अभी तक मोदी किट में ही उलझी हुई है।
राठौर ने भाजपा का कटाक्ष करते हुए कहा है कि उसे राजनीति करने के आगे कई अवसर और मौके मिलेंगे। यह समय किसी राजनीति का नही है, यह समय लोगों की समस्याओं को दूर करने का है। देश में कोरोना संक्रमण को लेकर लोग भयभीत हैं, ऐसे में लोगो की मदद सच्चे मन से की जानी चाहिए।
25 मार्च के पुनर्नियुक्ति आदेशों पर अभी तक नही आया कोई भी
विभाग में डाक्टरों और पैरामैडिकल के पद अभी भी खाली
शिमला/शैल। प्रधानमंत्री द्वारा 24 मार्च को देश भर में तालाबन्दी लागू कर दी गई थी जो तीन सप्ताह तक चलेगी। इसके बाद क्या होगा इसका पता 14 अप्रैल को लगेगा। तालाबन्दी के आदेशों के चलते पुरे देश में आर्थिक उत्पादन से जुडी हर गतिविधि बन्द हो गई है। इससे लाखों कामगार और उनके परिवार प्रभावित हुये हैं। हिमाचल भी इस प्रभाव से अच्छूता नही रहा है। यहां के औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूर और उनके परिवारों के करीब पांच लाख लोग प्रभावित हुये हैं। तालाबन्दी से यह लोग इस कदर प्रभावित हूये है कि अपने अपने घरों को वापिस जाने के अतिरिक्त इनके पास और कोई विकल्प शेष नही रह गया है। दूसरी ओर तालाबन्दी में यह आदेश कि जो जहां है वह वहीं रहे। इस आदेश की अनुपालना के लिये राज्य की सारी सीमाएं सील कर दी गई है। देश भर में यही स्थिति है। ऐसे लोगों के खाने ठहरने की व्यवस्था करने और सरकार के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिले के जिलाधीशों और पुलिस उपायुक्तों को दी गई है। प्रदेश में तालाबन्दी ही नही बल्कि कर्फ्यू लागू है तथा प्रदेश के भीतर भी एक जिले से दूसरे जिलो में जाने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। यह सब कोरोना के फैलाव को रोकने के लिये किया गया है क्योंकि सरकार को हर आदमी के जान माल की चिन्ता है। मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नजर रख रहे हैं और इस पर हर रोज प्रशासन से बातचीत करके प्रदेश को संबाधित भी कर रहे है।


शिमला/शैल। तालाबन्दी के कारण सारी कारोबारी गतिविधियां एकदम ठप हो गयी है। परिवहन के सारे साधन बन्द है। तालाबन्दी मे जो जहां है वह वहीं रहेगा यह आदेश है। इन आदेशों के चलते कामगार और उनके परिवार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। बहुत सारे कामगार अपने अपने स्थानों से पलायन करने की बाध्यता पर आ गये हैं। लेकिन ऐसा कर नही पा रहे हैं। ऐसे लोगों की सहायता के लिये केन्द्र सरकार ने आपदा प्रबन्धन अधिनियम के प्रावधानों के तहत यह निर्देश जारी किये हैं कि तालाबन्दी की अवधि के लिये उनका वेतन न काटा जाये। किराये के आवासों में रह रहे ऐसे लोगों के लिये मकान मालिकों को भी यह कहा गया है कि यह इन लोगों से एक माह का किराया न ले। सर्वोच्च न्यायालय में भी इस आश्य की कुछ याचिकाएं दायर हो गई है। जिनमें इस दिशा में उचित दिशा निर्देश जारी करने के आग्रह किये गये हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार से इस पर जबाव भी तलब किया है।
यह तालाबन्दी 21 दिनों की है और इसका कड़ाई से अनुपालन करने के आदेश है। अनुपालना की जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है। कामगारों की यह समस्या हर प्रदेश में है। हिमाचल में भी करीब पांच लाख लोग प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रभावित है। स्वभाविक है कि यदि यह कामगार एक बार अपने अपने औद्योगिक क्षेत्रों को छोड़कर चले जाते है तो इससे उद्योग भी प्रभावित होंगे। क्योंकि इन लोगों को वापिस काम पर आने में समय लगेगा। तय है कि इससे दोनों पक्ष प्रभावित होंगे।
इससे यह सवाल उठता है कि जब यह तालाबन्दी केवल 21 दिनों के लिये ही है और सरकार ने इनकी सहायता के लिये आदेश तक जारी कर दिये हैं। फिर उद्योगपति, कामगार और मकान मालिक सभी एक दूसरे पर विश्वास क्यों नही कर पा रहे हैं। क्या यह विश्वास नही हो पा रहा है कि यह कारोबारी गतिविधियां 22वें दिन पूर्ववत बहाल हो जायेंगे? क्या सरकार इस आश्य का कोई आदेश जारी नही कर सकती है कि यह कामगार 22वें दिन अपने अपने काम पर पहले की तरह लौट आयेंगे। क्या उद्योगों को सरकार पर विश्वास नही हो पा रहा है कि वह 22वें दिन अपने उद्योग को पूर्ववत चला पायेंगे। हिमाचल सरकार ने 2019 के पुरे वर्ष में निवेशक मीट आयोजित करके 93 हजार करोड़ के निवेश के एम ओ यू विभिन्न उद्योगपतियों से हस्ताक्षरित किये हंै। क्या ऐसे में राज्य सरकार को इस समय ऐसा आदेश नही जारी करना चाहिये कि हिमाचल मे स्थित उद्योग इन कामगारों को पहले की तरह 22वें दिन पूर्ववत काम पर रख लेंगे। यदि सरकार उद्योगपति, कामगार और मकान मालिक में विश्वास बहाल नही कर सकती है तो आम आदमी कैसे सरकार के प्रयासों पर विश्वास बना पायेगा।
शिमला/शैल।अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अब तक प्रदेश में कुल 2409 लोग दूसरे देशों से आए हैं और जिनमें से 688 लोगों ने 28 दिन की जरूरी निगरानी अवधि को पूरा कर लिया है एवं 1476 लोग अभी भी निगरानी में हैं। इसमें 179 लोग प्रदेश छोड़कर भी जा चुके हैं। आज प्रदेश में 17 लोगों के कोविड-19 के प्रति जांच के नमूने लिए गए थें तथा सभी की जांच रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई है। अब तक कुल 150 लोगों के जांच की जा चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि जो पूर्व में दो व्यक्ति कोविड-19 के प्रति पोजिटिव पाए जाने के उपरान्त Dr. RPGMC टाण्डा में उपचाराधीन हैं उनमें से एक की रिपोर्ट कोविड-19 के प्रति नेगेटिव हो चुकी है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि IT विभाग हि0प्र0, स्वास्थ्य विभाग के लिए एक नई वेब एप्लीकेशन बना रहा है जिसमें सभी गृह निगरानी में रखे गए लोगों की जानकारी उपलब्ध होगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने बताया कि प्रदेश स्वास्थ्य विभाग इस वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए वृह्द सूचना, शिक्षा एवं सम्प्रेषण गतिविधियाँ संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से जनसाधारण को विभाग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि कोविड-19 के संक्रमण को रोका जा सके।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने जनसाधारण से आह्वान किया कि वे व्यर्थ में मास्क और हैण्ड सैनिटाईजर खरीद कर अपनी आर्थिकी पर बोझ ना डालें बल्कि अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें, साबुन से समय-समय पर हाथ धोतें रहें, छींकनें और खाँसनें के दौरान शिष्टाचार का पालन करें। यह आवश्यक नहीं कि आपको हैण्ड सैनिटाईजर लेना आवश्यक है, यदि यह उपलब्ध ना भी हों तो भी हम साबुन से सही तरह अपने हाथ धोने की आदत अपना कर इस रोग के संक्रमण से बच सकते हैं। यदि आपको खाँसी या बुखार है तो किसी के सम्पर्क में ना आएं, सार्वजनिक स्थानों पर ना थूँके, अगर आप अस्वस्थ महसूस करते हैं तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या चिकित्सक से सम्पर्क करें। यह जरूरी नहीं कि खाँसी या बुखार केवल कोराना वायरस के ही लक्षण हों, ये किसी अन्य बिमारी के भी लक्षण हो सकतें है, इसलिए कोरोना वायरस की सही जानकारी एवं सुरक्षा के दिशानिर्देशांे का सजगता से पालन कर आप स्वयं व दूसरों को इसके संक्रमण के प्रभाव से सुरक्षित रख सकते है। इसलिए यह भी पुनः अनुरोध किया की क्फर्यू की ढ़ील के दौरान भी अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें एवं कोविड-19 के संक्रमण के रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग दें। यदि किसी कारणवश घर से बाहर जाना भी पडता है तो अपने बचाव के लिए सजग एवं सतर्क रहें।